3.5.20

योगेन्द्र जाट की कविता - '' कान्हा कर मेरी वकालत ''







कान्हा कर मेरी वकालत


उनसे करा दे मेरा फैसला म्हारे सांवरिये सरकार. 
मैनें किया मुकदमा उन पर उनकी झूठी सारी बात . 
वादा एक ना निभाया मुझसे बनायें बहाने हजार , 
उनकी नौकरी मेरी बैरन बनी हम दोनों की टकरार . 

मेरी सुन कान्हा तू शिकायत उनकी लेट आंन की आदत, 
मैं देखूं बाट चौबारे पे उन्हे दिखे ना मेरी हालत. 
मैने उनकू  बनाई राबडी और छाछ पर उनके अलग ही दिखे ठाट 
सो मैं आई हूँ तेरी अदालत मेरी कर कान्हा तू वकालत . 

जाने किसने किया है उन पर टोना जरा बता मेरे श्याम सलोना, 
उनको नेक तरस ना आवे मुझे दिन रैना तड़पावे, 
मैं करू तेरी इवादत मुझे लौट वा दे कान्हा मेरी अमानत . 
मैं आई हूँ तेरी अदालत मेरी कर कान्हा तू बकालत . **


  -  योगेन्द्र जा    jnv swm 2019








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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई

 माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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