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31.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - “ देवी तुम्हें प्रणाम् ! ” ( भाग - 2 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




28.8.21

पवन शर्मा की कविता - " हौसला "

 यह कविता , पवन शर्मा की पुस्तक -  " किसी भी वारदात के बाद "    ( कविता - संग्रह )   से लिया गया है -











हौसला 


देखो , तुम सब लोग 

आँखें खोलकर देखो 

और सुनो उसकी चीखें 

क्या तुम्हें नहीं लगता कि

उसकी चीखों से आसमान फट पड़ेगा 

तार - तार हो गए हैं उसके कपड़े 

और शरीर से रिस रहा है खून 

बिलबिला रहा है 

कोलतार की सड़क पर पड़ा 


देखो तुम सब लोग 

कैसी मर्दानगी दिखा रहा है 

मूँछें ऐंठ रहा है और सड़क पर 

बार - बार डंडा पटक रहा है 

लगता है 

मांद से शेर निकल कर 

घूम रहा है 

बिछा दिया है उसने सड़क पर 

एक भरा - पूरा आदमी 

ऐसे ही तो बिछाते थे क्रूर शासक 

अपनी निरीह प्रजा को 


हैरान हूँ मैं 

तार - तार आदमी 

थरथराता हुआ खड़ा हो गया है फिर 

मुमकिन है 

उसकी शिराओं में रक्त 

जैसे मुरझाया पौधा पानी पाकर 

तन रहा है -- आंधी के मुकाबले के लिए 

उसकी शिराओं में 

अजीब हौसला बहने लगा है   **


                                   - पवन शर्मा 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

26.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " कविता - कहानी "

 यह कविता , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( कविता - संग्रह ) से ली गया है -











कविता - कहानी 


अनुभूतियों से गुजर कर 

बनते हैं शब्द 

कविता |


...और 

गुजर कर अनुभवों से 

इंसान 

कहानी |  **


             - श्रीकृष्ण शर्मा 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


24.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा – “ देवी तुम्हें प्रणाम् ! ” ( भाग - 1 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी  छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




22.8.21

कवि मुकेश गोगड़े की कविता - " राखी की हिफाज़त "

 

रक्षाबंधन की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।।   
















राखी की हिफाज़त













बेख़ौफ घर से निकलने का वादा मांगती है।
बहन क्या इतना सा भी ज्यादा मांगती है।
जमानेभर में प्रसारित ख़बरों को देखकर।
कलाई की राखियां भी हिफाज़त मांगती है।।

क़दम से क़दम मिलाकर जीत दिलाती है।
बेसुरे अल्फाज़ो को भी सुरीला बनाती है।
प्रीत के सरोवर में इतनी कलुषिता देखकर।
कलाई की राखियां भी हिफाज़त मांगती है।।

कोख में घुटती सांसे भी रिहाई मांगती है।
भाई-बहन का समान अधिकार मांगती है।
पौरुष प्रधानता का इतना ढ़ोंगीपन देखकर ।
कलाई की राखियां भी हिफाज़त मांगती है।।

प्रीत के धागों में कितनी सत्यता वो जानती है।
सौतेला व्यवहार देखकर भी दुआएं मांगती है।
बंजर हो जाएगा जहाँ,माँ, बहन,बेटी के बिना।
कलाई की राखियां भी हिफाज़त मांगती है।।

                             - मुकेश गोगड़े

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

21.8.21

कवि चमन ' भारतीय ' की कविता - " एक बहन का प्यार अपने फौजी भाई के नाम ! "

 











एक बहन का प्यार अपने फौजी भाई के नाम !  


दिल में हैं बहुत अरमान
पर तुम हो सीमा पर जवान
देश की रक्षा की ख़ातिर
तुमने जो ये क़सम खाई है
हमने भी इस रक्षा बंधन पर सौगन्ध यह खाई है
देश के प्रति कर्तव्य
हम भी निभायेंगे
तुम हो सीमा पर तो
देश यह है सुरक्षित है
इस रक्षा बंधन पर हम
उनके लिए थाल सजाये बैठे हैं 
जो मातृ भूमि की खातिर
अपना शीश नवाएँ बैठे हैं  !  **


                       - चमन 'भारतीय'

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

20.8.21

पवन शर्मा की लघुकथा - बेकारी में "

 यह लघुकथा पवन शर्मा की पुस्तक - " हम जहाँ हैं " ( लघुकथा - संग्रह ) से लिया गया है -





बेकारी में 


उसके साथ अक्सर ऐसा ही होता है , लगभग रोज - रोज !
          हो भी क्यों नहीं | कुछ करता भी तो नहीं है | भाई के पैसों से कब तक घर चलता रहेगा ? पापा हैं जो ' घोटाले ' में पकड़े गए | पापा कहते हैं - " इंजीनियरों ने खाया ' और पूरा उनके मत्थे मढ़ दिया ! ' जो भी हो | अब तो सस्पेंड होकर घर में बैठे हैं |
           वह रसोई में जाता है मम्मी रोटियाँ बना रही हैं | वह कहता है ,  ' देखो मम्मी , पापा को समझा दो | रोज - रोज की चख - चख मुझे पसंद नहीं है ... मुझे भी तो चिंता है | '
          पापा ने शायद सुन लिया | वह रसोई के दरवाजे पर हाथ टिकाकर बोले,   ' चिंता होती तो कोशिश करता | समझा ! बैठे - बैठे रोटियाँ थोड़े ही तोड़ता ! ' 
          ' ... और आप ? ' गुस्से में वह भरभरा जाता है |
          अचानक मम्मी रोटी बेलना छोड़कर खड़ी हो गईं | पापा जा चुके थे ... |  ** 


                                        - पवन शर्मा 

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पता -

श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय

जुन्नारदेव , जिला – छिंदवाड़ा ( मध्यप्रदेश )

फोन नम्बर –   9425837079

Email –    pawansharma7079@gmail.com  

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


18.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " “ लाड़ - लढैती बेटियाँ ” ( भाग - 10 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




16.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " धूप "

 यह कविता श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( कहानी - संग्रह ) से लिया गया है -











धूप 


गिर पड़ी 

सहसा फिसल कर 

उतरती हुई धूप |


और 

फैल गयी 

नयी - नयी सम्भावनाओं की तरह |


गिरा हुआ आदमी 

धूप क्यों नहीं बन पाता भला ?  **


                               - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


14.8.21

डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ’ का कविता संकलन - " “मन के मनके”

 


प्रिय बंधुवर,
            
       मेरा नया कविता संकलन “मन के मनके” प्रकाशित हुआ है। कृपया निम्लिखित लिंकस पर जा कर मेरे नये कविता संकलन "मन के मनके" का अवलोकन करें और पुस्तक आर्डर करके मेरी कविताओं की समीक्षा करें एवं अपनी टिप्पणी दें।

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       धन्यवाद!
 
डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ
संपादक, साहित्यसुधा

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

12.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा – “ लाड़ - लढैती बेटियाँ ” ( भाग - 9 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




10.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " “ लाड़ - लढैती बेटियाँ ” ( भाग - 8 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




8.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " सामर्थ्य "

 यह कविता , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( कविता - संग्रह ) से ली गई है -












सामर्थ्य 


ऊपर 

देखता हुआ 

सोच रहा था मैं -

शायद 

आकाश से बड़ा 

कुछ नहीं है |


तभी 

मैंने बड़े अचरज से देखा -

एक चिड़िया आयी

और पार निकल गयी |   **


                     - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


6.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " तूफ़ान "

 यह कविता , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( कविता - संग्रह से ली गई है -












तूफ़ान 


जंगल के इस कौने में 

रात भर प्रेत नाचते रहे |


उनसे 

सहमी हवा 

अन्दर आने को 

घर - घर साँकल खटखटाती 

दरवाजे भड़भड़ाती 

और 

चीखती - चिल्लाती फिरी |  **


                  - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


3.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " छांह पर भी हक़ नहीं है "

 यह कविता , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( काव्य - संग्रह ) से लिया गई  है -



 









छांह पर भी हक़ नहीं है 


है कहाँ 

वह सुखद हरियाली ,

कहाँ फूलों - सरीखा 

ख़ुशनुमा ईमान ?


अब तो -

छांह पर भी हक़ नहीं है 

धूप औ' लू में खड़ा इंसान !  **


                         - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


1.8.21

पवन शर्मा की कविता - " सुनो साधो "

 यह कविता , पवन शर्मा की पुस्तक - " किसी भी वारदात के बाद " ( कविता - संग्रह ) से ली गई है -











सुनो साधो 


सुनो साधो

चलो , चलें और 

बैठें उसी पुल पर 

जहाँ हम पहले बैठा करते थे 


बिता दें सारी रात 

बतियाते हुए 


कितने दिन हो गये 

न तुमने अपनी कही 

न मेरी सुनी 


गले तक नहीं मिले साधो 

सुनो साधो 

नहीं सीखी तुमने 

दुनियादारी 

नहीं पहिचान पाये 

गिरगिटों के रंग 

बीड़ी पीते रहे 

बैरागी बने 

घूमते रहे 


साधो , सुनो मेरे यार 

कुछ हासिल नहीं कर पाये तुम 

जीवन में 

हथेली रगड़ते रहे 

दाढ़ी सहलाते रहे 

झूठे भ्रमों में 

पलते रहे सदा 


सुनो साधो 

पर - दुखों में तुम 

लिपट जाते पेड़ों से 

ढुलकाते रहते आँसू 

सुलगाते रहते अपनी देह 


सचमुच साधो 

गऊ हो तुम 

जिसने जिधर हाँका 

उधर चल पड़े 

नदियों के ऊपर 

किसी भी दिशा में 


साधो 

तुम सदा 

यही तो चाहते थे न कि

जब दमें की खाँसी से तुम 

दुहरे हो जाओ 

दर्द से तड़प उठो तब 

तुम्हारी छाती और पीठ को 

सहलाने वाले हाथ 

तुम्हारे करीब हों 


तुम्हारी स्मृतियों को हर करने वाले 

तुम्हारे करीब हों 

तुम्हारी यात्राओं और संवेदनाओं के सहभागी 

तुम्हारे करीब हों 


सुनो साधो 

यदि ऐसा नहीं हुआ 

तब ?  **


                              - पवन शर्मा 


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पता -

 श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय

जुन्नारदेव , जिला – छिंदवाड़ा ( मध्यप्रदेश )

फोन नम्बर –   9425837079

Email –    pawansharma7079@gmail.com  


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.