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31.1.21

कवि , लघुकथाकार , कहानीकार - पवन शर्मा की कविता - " खिड़कियों से झाँकते पिता "

 यह कविता , पवन शर्मा की पुस्तक - " किसी भी वारदात के बाद " ( कविता - संग्रह ) से लिया गया है -











खिड़कियों से झाँकते पिता

 

पत्थर उछालते हैं बच्चे

देखते हैं पत्थर की ऊँचाई

उनकी आँखों में उतर आता है

पूरा आसमान !

 

बच्चे खेलते हैं गेंद

करते हैं हँसी ठिठोली

दूर से देखते हैं नंग – धड़ंग बच्चे

उग आती है

उनके पूरे जिस्म में भूख !

 

सूखी लकड़ियाँ इकट्ठी करते हैं बच्चे

खेलते – खेलते

लगातेहैं आग

उठती है लपट

बच्चे खुश होते हैं

बजाते हैं ताली !

 

खेलते – खेलते जिद करते हैं बच्चे

पहाड़ पर चढ़ने की

छूना चाहते हैं

सूरज को

लीलना चाहते हैं

 

खिड़कियों से झाँकते हैं

बच्चों के पिता

घर में हाजिर हो जाने का हुक्म

जारी कर देते हैं

 

बच्चे घर में दाखिल नहीं होते

चढ़ जाते हैं पेड़ पर

कुतरने लगते हैं

पेड़ की पत्तियां

और

खोदने लगते हैं

जड़ !

 

खिड़कियों से झाँकते

बच्चों के पिता

फटी – फटी आँखों से

देखते रह जाते हैं **


               - पवन शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


30.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " बैठो तो मैं देख लूँ " ( भाग - 12 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -



 

29.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - " होरी - सा बुझा हुआ बैठा "

 यह नवगीत , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " एक नदी कोलाहल  " ( नवगीत - संग्रह ) से लिया गया है -











होरी – सा बुझा हुआ बैठा

 

भीड़ में मिले थे हम दोनों ,

कह सके नहीं जो था कहना !

फिर एक बार जो बिछुड़े तो ,

खो गया कहीं मन का लहना !!

 

फिर दर्द लिये वह बिछुड़न का ,

आधी साँसों से राह चले !

आशाओं के बादल पिघले ,

वेदना – व्यथित अँधियार पले !!

 

रंगों ने चाहा बहलाना ,

रूपों ने चाहा उलझाना !

पर बाबर – जैसा रहा मुझे ,

फिर समरकन्द औ’ फरगाना !!

 

इच्छाएँ सारी ज़िबह हुई ,

सब सपने भुने काढ़ावों में !

होरी – सा बुझा हुआ बैठा ,

तुम बिना न आग अलावों में !! **


                      - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


28.1.21

कवि बोधिसत्व कस्तूरिया की कविता - " भारत माता शरमिंदा है "

 













भारत माता शरमिंदा है


गणतंत्र दिवस पर भारत माता शरमिंदा है।
खालिस्तानी दंश अभी भी धरा पर जिंदा है।।
पुलिस प्रशासन के निर्देश पर किसान चले,
पर आतंकियों के कारण उनके गले फंदा है।।
72 वर्ष मे ही ढह गया गणतंत्र का अभिमान,
अलगाववादी शक्तियों का मनसूबा जिंदा है।।
राजनीति के गंदे चेहरे राष्ट्रवाद से भी डरते है,
कयोंकि संविधान उनके लिए फांसी फंदा है।।  **

                      -  बोधिसत्व कस्तूरिया

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " बैठो तो मैं देख लूँ " ( भाग - 11 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




27.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " बैठो तो मैं देख लूँ " ( भाग - 10 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




26.1.21

कवि संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " मातृभूमि "

 

मातृभूमि है भारत अपना
दुनिया में है सबसे न्यारा
ऋषि संतो की धरती भारत
मंदिर घाटो की स्थली भारत
ज्ञान विज्ञान की पहचान भारत
सभ्यता की जननी है भारत
वीर सपूतो की धरती भारत
धरती का स्वर्ग है भारत
विविधता में एकता की स्थली भारत
योग आयुर्वेद की भूमि भारत
दूनिया को पाठ पढाती भारत 
विश्व पटल का सौन्दर्य भारत
पर्वत पठारो से भरा परा
नदि नहर से हरा भरा
खेत खलिहान से सजाधजा
सुगंध से संसार को महका रहा
मानचित्र पर खूब दिख रहा
मातृभूमि है भारत अपना
दूनियां में है सबसे न्यारा  **

   - संगीत कुमार वर्णबाल 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


कवि बोधिसत्व कस्तूरिया की कविता - " जय हिंद "


 जय हिंद


जय हिंद का दिया जिसने उदघोष !
बेशक हो गया अब वो खामोश !!
पर केवल उनका ख्याल भर दे जोश !
उनके पराक्रम पर ममता दे रही दोष !! 
क्यो 'पराक्रम दिवस' उनकी जयन्ती ?
सत्ता की राजनीत कितनी है मदहोश ?
देर से सही पर उनका पराभव जगा ,
जननायक था केवल गुलामी आक्रोष !!  **


              - बोधिसत्व कस्तूरिया 

                                          एडवोकेट आगरा 
                                  9412443093 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " वो आजादी है कहाँ ? " ( भाग - 1 )

यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -


 

25.1.21

संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " वीरों का बलिदान "

 












वीरों का बलिदान


स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान
याद रखेगा वीरों का बलिदान
कितनो  ने किये अपनी जवानी कुर्बान
भारत मां के पूत महान 
धन्य है उस मां का कोख
जिसने जन्म दिये वीर महान
हम सब करते उनका सम्मान
परतंत्रता की जंजीरो को तोड़ा
दुश्मनो का छक्का छुड़ाया
खदेड़ उन्हें भारत से भगाया
 मानव सपना को साकार किया
भारत को स्वतंत्र किया
सबके मन में हर्षित पुष्प खिला
मानव जीवन खुशहाल हुआ
स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान
याद रहेगा वीरों का बलिदान  **

       - संगीत कुमार वर्णबाल 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

24.1.21

लघुकथाकार , कवि , कहानीकार - पवन शर्मा की लघुकथा - " गंध "

 यह लघुकथा , पवन शर्मा की पुस्तक - " हम जहाँ हैं " ( लघुकथा - संग्रह ) से ली गई है -






                      गंध

 

‘ अरे , आप यहाँ पधारे महाराज ... हमारे गाँव ... हमारे घर ! ’  कहता हुआ बुधना उनके पैरों में बिछ गया |

          उन्होंने खादी के कुर्ते की आस्तीनें ऊपर चढ़ाई | पीछे मुड़कर भीड़ की ओर देखा और होठों पर मुस्कान लाकर बुधना को उठाते हुए बोले ,  ‘ हाँ भई ... हम आए हैं तुम्हारे गाँव ... तुम्हारे दुःख – दर्द को सुनने के लिए | ’

          बुधना के साथ खड़े गाँव के आदिवासी कभी उन्हें देखते , तो कभी उनके पीछे खड़ी भीड़ को | भीड़ में उनके चहेते और बड़े – छोटे अधिकारी थे | हर पाँच वर्ष में बुधना के  ‘ महाराज ’  गाँव के आदिवासियों से मिलने आते और उनके दुःख – दर्द को पूछते | बाकी के दिनों में अक्सर गाँव के ये आदिवासी अपने दुःख – दर्द को उन तक अपने पत्रों या आवेदन – पत्रों के द्वारा पहुँचाते |

          बुधना ने एक तरफ खड़े होकर अपने अठारह वर्षीय लडके बिसना से कहा ,  ‘ देख रेबिसना , जे ही अपने करतार हैं ... अन्नदाता हैं ... पाँव लाग ... पाँव ! ’

          बिसना भी उनके पैरों में बिछ गया | उन्होंने फिर खादी के कुर्ते की आस्तीनें ऊँपर चढ़ाई और बिसना को उठाया |

          ‘ देख बब्बा ... महाराज को कुरता कैसे झक्क – झक्क कर रओ है!’  उन्हें दूसरों से बातें करते देख बिसना धीरे से बुधना से कहता है | 

          ‘ महाराज जमीन पर चलत हैं का जो अपन की बंडी जईसे उनको कुरता मैलो – चीकट हो जाए ... महाराज बड़ी – बड़ी कार में चलत हैं और आसमान में उड़त हैं | ’  बुधना ने कहा |

          ‘ तबई तो उनके पैरों में धूल तक नईं लगी | ’  बिसना उनके पैरों को देखता हुआ बोला |

          अचानक भीतर से बुधना की घरवाली निकलकर आई और महाराज के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई |

          ‘ आप ठीक हैं ना ! कोई तकलीफ तो नहीं है ? ’ उन्होंने पूछा |

          ‘ सबई ठीक – ठाक है ... आपकी किरपा है | ’  बुधना की घरवाली ने कहा |

          अचानक उन्होंने अपने नाक पर रुमाल रखा ,  ‘ ये कैसी स्मेल आ रही है ? ’

          उनके पीछे खड़े चहेते और बड़े – छोटे अधिकारी चौंके ,  ‘ लगता है सर ! कोई चीज सड़ रही है अथवा कोई चूहा , कुत्ता या जानवर मर गया है ... सर ... ये उसकी स्मेल है ! ’

          ‘ हाय दैया ! ... मैं रोटी बना रही थी ... तवे पर छोड़

 आई ... सगरी जल गई ! ’  कहती हुई बुधना की घरवाली भीतर

 की ओर तेजी से  चली गई | ** 


                       - पवन शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर (

 राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

23.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " बैठो तो मैं देख लूँ " ( भाग - 9 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




22.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " बैठो तो मैं देख लूँ " ( भाग - 8 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




21.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का हायकू - " होगा क्या राम ? " ( भाग - 16 से 22 )

 यह हायकू , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अँधेरा बढ़ रहा है " ( नवगीत - संग्रह ) से लिया गया है -






हायकू 


 

( 16 )

खुबसूरत

     है बया का घोंसला ,

          पर हॉल में |

 

( 17 )

ज्योति – पर्व है

     मावस के तम का ,

          गर्व खर्व है |

 

( 18 )

मावस काली

     ओढ़ कर उजाली ,

          बनी दिवाली |

 

( 19 )

होगा क्या राम ?

     देशी घोड़ी पहने ,

          लाल लगाम |

 

( 20 )

अपना देश

     नेताई करतूतों  ,

          का ज़िन्दा वेश |

 

( 21 )

अँग्रेजी रानी

     अपने ही घर में ,

          हिन्दी बेगानी |

 

( 22 )

साड़ी है चिन्दी ,

     माथे पर है बिन्दी ,

          बेचारी हिन्दी | **


        - श्रीकृष्ण शर्मा 

 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.






20.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का हायकू - " होगा क्या राम ? " ( भाग- 11 से 15 तक)

 यह हायकू , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अँधेरा बढ़ रहा है " ( नवगीत - संग्रह ) से लिया गया है -















हायकू 


( 11 )

जन्मा करते

     दर्दीली सीपी में ही ,

          गीतों के मोती |

 

( 12 )

अन्धे तम में

     दिखते सचमुच ,

          स्वप्न सलोने |

 

( 13 )

आँख खोल के

     किसने अब तक ,

          देखे सपने |

 

( 14 )

झूठ बोलता

     कहीं अगर वह ,

          सजा न होती |

 

( 15 )

मनुज अभी

     पशु तक से पीछे ,

          स्वामिभक्ति में | **


       - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

 


19.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का हायकू - " होगा क्या राम ? " ( भाग - 6 से 10 )

 यह हायकू , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अँधेरा बढ़ रहा है " ( नवगीत - संग्रह ) से लिया गया है -















हायकू 


( 6 )

रहा न कोई

     सुदृढ़ व्यूह तक ,

          बचा नाश से |

 

( 7 )

इस धरती

     पर जो जन्मा वह ,

          अमर नहीं |

 

( 8 )

बरसा मेह

     चमकती बिजली ,

          गेह अँधेरा |

 

( 9 )

स्याह बदरा

     सतरंग चुनरी ,

          ऊजर कौंधा |  

 

( 10 )

घन गरजे

     वह कौंधा लपका ,

          पानी बरसा |  **


                - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.