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14.1.21

संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " मकर संक्रांति "

 








मकर संक्रांति 

गुड़ की मिठास
मन में उल्लास
पतंगों की आस                    
धागा अपने पास
संक्रांति बने खास
खूब मिल करो रास
बन जाए विश्वास
खाओ गुड़ तील साथ **


( मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं )


- संगीत कुमार वर्णबाल 

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