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25.1.21

संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " वीरों का बलिदान "

 












वीरों का बलिदान


स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान
याद रखेगा वीरों का बलिदान
कितनो  ने किये अपनी जवानी कुर्बान
भारत मां के पूत महान 
धन्य है उस मां का कोख
जिसने जन्म दिये वीर महान
हम सब करते उनका सम्मान
परतंत्रता की जंजीरो को तोड़ा
दुश्मनो का छक्का छुड़ाया
खदेड़ उन्हें भारत से भगाया
 मानव सपना को साकार किया
भारत को स्वतंत्र किया
सबके मन में हर्षित पुष्प खिला
मानव जीवन खुशहाल हुआ
स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान
याद रहेगा वीरों का बलिदान  **

       - संगीत कुमार वर्णबाल 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

24.1.21

लघुकथाकार , कवि , कहानीकार - पवन शर्मा की लघुकथा - " गंध "

 यह लघुकथा , पवन शर्मा की पुस्तक - " हम जहाँ हैं " ( लघुकथा - संग्रह ) से ली गई है -






                      गंध

 

‘ अरे , आप यहाँ पधारे महाराज ... हमारे गाँव ... हमारे घर ! ’  कहता हुआ बुधना उनके पैरों में बिछ गया |

          उन्होंने खादी के कुर्ते की आस्तीनें ऊपर चढ़ाई | पीछे मुड़कर भीड़ की ओर देखा और होठों पर मुस्कान लाकर बुधना को उठाते हुए बोले ,  ‘ हाँ भई ... हम आए हैं तुम्हारे गाँव ... तुम्हारे दुःख – दर्द को सुनने के लिए | ’

          बुधना के साथ खड़े गाँव के आदिवासी कभी उन्हें देखते , तो कभी उनके पीछे खड़ी भीड़ को | भीड़ में उनके चहेते और बड़े – छोटे अधिकारी थे | हर पाँच वर्ष में बुधना के  ‘ महाराज ’  गाँव के आदिवासियों से मिलने आते और उनके दुःख – दर्द को पूछते | बाकी के दिनों में अक्सर गाँव के ये आदिवासी अपने दुःख – दर्द को उन तक अपने पत्रों या आवेदन – पत्रों के द्वारा पहुँचाते |

          बुधना ने एक तरफ खड़े होकर अपने अठारह वर्षीय लडके बिसना से कहा ,  ‘ देख रेबिसना , जे ही अपने करतार हैं ... अन्नदाता हैं ... पाँव लाग ... पाँव ! ’

          बिसना भी उनके पैरों में बिछ गया | उन्होंने फिर खादी के कुर्ते की आस्तीनें ऊँपर चढ़ाई और बिसना को उठाया |

          ‘ देख बब्बा ... महाराज को कुरता कैसे झक्क – झक्क कर रओ है!’  उन्हें दूसरों से बातें करते देख बिसना धीरे से बुधना से कहता है | 

          ‘ महाराज जमीन पर चलत हैं का जो अपन की बंडी जईसे उनको कुरता मैलो – चीकट हो जाए ... महाराज बड़ी – बड़ी कार में चलत हैं और आसमान में उड़त हैं | ’  बुधना ने कहा |

          ‘ तबई तो उनके पैरों में धूल तक नईं लगी | ’  बिसना उनके पैरों को देखता हुआ बोला |

          अचानक भीतर से बुधना की घरवाली निकलकर आई और महाराज के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई |

          ‘ आप ठीक हैं ना ! कोई तकलीफ तो नहीं है ? ’ उन्होंने पूछा |

          ‘ सबई ठीक – ठाक है ... आपकी किरपा है | ’  बुधना की घरवाली ने कहा |

          अचानक उन्होंने अपने नाक पर रुमाल रखा ,  ‘ ये कैसी स्मेल आ रही है ? ’

          उनके पीछे खड़े चहेते और बड़े – छोटे अधिकारी चौंके ,  ‘ लगता है सर ! कोई चीज सड़ रही है अथवा कोई चूहा , कुत्ता या जानवर मर गया है ... सर ... ये उसकी स्मेल है ! ’

          ‘ हाय दैया ! ... मैं रोटी बना रही थी ... तवे पर छोड़

 आई ... सगरी जल गई ! ’  कहती हुई बुधना की घरवाली भीतर

 की ओर तेजी से  चली गई | ** 


                       - पवन शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर (

 राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

23.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " बैठो तो मैं देख लूँ " ( भाग - 9 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




22.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " बैठो तो मैं देख लूँ " ( भाग - 8 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




21.1.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का हायकू - " होगा क्या राम ? " ( भाग - 16 से 22 )

 यह हायकू , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अँधेरा बढ़ रहा है " ( नवगीत - संग्रह ) से लिया गया है -






हायकू 


 

( 16 )

खुबसूरत

     है बया का घोंसला ,

          पर हॉल में |

 

( 17 )

ज्योति – पर्व है

     मावस के तम का ,

          गर्व खर्व है |

 

( 18 )

मावस काली

     ओढ़ कर उजाली ,

          बनी दिवाली |

 

( 19 )

होगा क्या राम ?

     देशी घोड़ी पहने ,

          लाल लगाम |

 

( 20 )

अपना देश

     नेताई करतूतों  ,

          का ज़िन्दा वेश |

 

( 21 )

अँग्रेजी रानी

     अपने ही घर में ,

          हिन्दी बेगानी |

 

( 22 )

साड़ी है चिन्दी ,

     माथे पर है बिन्दी ,

          बेचारी हिन्दी | **


        - श्रीकृष्ण शर्मा 

 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.