3.4.20

पवन शर्मा की लघुकथा - '' यथार्थ ''



           



                       ( प्रस्तुत लघुकथा – पवन शर्मा की पुस्तक – ‘’ हम जहाँ हैं ‘’ से ली गई है ) 

                    यथार्थ 


सभी शांत हैं ...अम्मा , बाबूजी , सुनीता और पलंग पर लेटा सुरेश | गहरी समस्या  है  इनके सामने  |  शिरीष की माँ का ख़त आया है  की आप लोग  ' हाँ '  कह दें तो जल्दी ही मुहूर्त निकलवा लूँ , जिससे इस काम से मुझे मुक्ति मिल जाए |
          ' शिरीष जैसा लड़का अगर हाथ से निकल गया तो और लड़के मिलने मुश्किल हैं | '  बाबूजी ने कहा |
          ' अरे ! लड़के मिल ही कहाँ रहे हैं ... मिल भी रहे हैं तो पच्चीस - पच्चीस हजार की माँग करते हैं | शिरीष की माँ ने कहा है - देखो बहन मुझे लेना - देना कुछ है नहीं लड़की सुशील होनी चाहिए | मैनें कह दिया , हमारी सुनीता भी किसी लड़की से कम नहीं है ...और शिरीष ... शिरीष ... शिरीष ! जब देखो , तब शिरीष का गुणगान करते रहते हैं ये लोग | न जाने जाने कौन - सा जादू कर दिया है शिरीष ने इन लोगों के ऊपर |
          ' इसके हाँ कहने भर की देर है , उधर तो तैयार हैं | '  बाबूजी ने कहा |
          ' ऐसा करो ... कल तुम जाकर शिरीष की माँ से कह दो ... जल्दी मुहूर्त निकलवा लें | '  अम्मा ने बाबूजी से कहा |
          ' नहीं ... नहीं कहना है हाँ | मैं शिरीष से शादी नहीं करुँगी | '  सुनीता बोली और खड़ी हो गई |
          ' आख़िर क्यों बेटी ? '  अम्मा ने पूछा |
          बाबूजी ने उसकी तरफ देखा ... सुरेश वैसे ही लेटा रहा |
          ' बस , यों ही ... पढ़ी - लिखी हूँ ...अपना अच्छा - बुरा समझती हूँ | '  सुनीता ने कहा ,  ' मैं आपसे सिर्फ़ एक बात पूछना चाहती हूँ अम्मा ... बिना नौकरी के शिरीष मेरा तथा अपनी माँ का पेट कैसे भरेगा ? ' ... माना कि वह अच्छा है ... खूबसूरत है ... खानदानी है | लेकिन अच्छाई और खूबसूरती से तो किसी का पेट भर नहीं जायेगा | कब तक अपने बाप के पैसों से घर का खर्च चलाएगा !... बस , इसी वजह से मैं शिरीष से शादी नहीं कर सकती अम्मा | '  कहकर सुनीता दरवाजा खोलकर अपने कमरे में चली गई |
          ... और एकदम सन्नाटा फैल गया | उसी सन्नाटे में अम्मा और बाबूजी वैसे ही बैठे रहे ... सुरेश वैसे ही लेटा रहा पलंग पर ... | आगे एक सच खड़ा था |
                                                           
                                                     **  
                                                              
                                                           - पवन शर्मा 
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पवन शर्मा
लघुकथाकार , कहानीकार , कवि

पता
श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट  विद्यालय ,
जुन्नारदेव  , जिला - छिन्दवाड़ा ( म.प्र.) 480551
फो. नं. - 9425837079 .
ईमेल – pawansharma7079@gmail.com



संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867



























2.4.20

तुलसी तुम्हें प्रणाम - ( भाग - 6 )


            ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा – सतसई - ‘ मेरी छोटी आँजुरी ’ से लिया गया है )



1.4.20

तुलसी तुम्हें प्रणाम - ( भाग - 4 )


            ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा – सतसई - ‘ मेरी छोटी आँजुरी ’ से लिया गया है )




31.3.20

तुलसी तुम्हें प्रणाम - ( भाग - 3 )


     ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा – सतसई - ‘ मेरी छोटी आँजुरी ’ से लिया गया है )





30.3.20

तुलसी तुम्हें प्रणाम - ( भाग - 2 )


    ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा – सतसई - ‘ मेरी छोटी आँजुरी ’ से लिया गया है )