19.9.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " कविता का सिरमौर " ( भाग - 4 )

 श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




18.9.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " कविता का सिरमौर " ( भाग - 2 )

 

श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिए गया है -




17.9.20

डॉ० अनिल चड्डा , सम्पादक - साहित्यसुधा - " आवश्यक सूचना "



मान्यवर,

यदि आप प्रकाशन के लिए अपनी रचना भेजना चाहते हैं तो मंगल यूनिकोड फॉन्ट में वर्ड में टाइप करके अपने परिचय 

और चित्र के साथ sahityasudha2016@gmail.com पर भेज सकते हैं। 

यदि आपने 'साहित्यसुधा' में प्रकाशन के लिए अपनी रचना भेजी है तो उसके लिए धन्यवाद। रचना की समीक्षा करने के बाद यदि यह उचित पाई जाएगी तो रचना को साहित्यसुधा में प्रकाशित कर दिया जायेगा जिसके प्रकाशन की सूचना आपको मेल द्वारा भेज दी जाएगी। कृपया ध्यान दें कि साहित्यसुधा माह में दो बार - 1 तारीख और 16 तारीख़ को प्रकाशित की जाती है। अत:, चाहे मेल प्राप्त हो या न हो, आप इन तारीखों को http://www.sahityasudha.com पर जा कर अपनी रचना देख सकते हैं

 यदि आप  अपनी रचना पहली बार भेज रहे हैं और आपने रचना के साथ अपना चित्र और परिचय नहीं भेजा है तो कृपया अपने चित्र के साथ यूनिकोड फॉण्ट में अपना परिचय भी अवश्य भेजे। जिन रचनाकारों ने पहले परिचय भेजा हुआ है, तो उन्हें फिर से परिचय भेजने की आवश्यकता नहीं है

कृपया ध्यान दें:-  यदि रचना/परिचय  यूनिकोड फॉण्ट में  नहीं है  तो उस  पर विचार करना मुश्किल हो सकता है। अत:, भेजने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि रचना मंगल यूनिकोड फॉण्ट में है 
धन्यवाद,


--

डॉ० अनिल चड्डा 
सम्पादक 
साहित्यसुधा

डॉ० अनिल चड्डा , सम्पादक - साहित्यसुधा - " साहित्यसुधा का सितम्बर(द्वितीय),2020 अंक "



मान्यवर,
 
‘सहित्यसुधा के प्रेमियों को यह  बताते हुए हर्ष हो रहा है कि साहित्यसुधा’ का सितम्बर(द्वितीय), 2020 अंक अब https://sahityasudha.com   पर उपलब्ध हो गया है। कृपया साहित्यसुधा की  वेबसाइट  पर जा कर साहित्य का आनंद उठायें। आपसे अनुरोध है कि इसमें प्रकाशित सामग्री पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजें जिससे रचनाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा। आपसे यह भी अनुरोध है कि आने वाले अंकों में प्रकाशन हेतु अपनी मौलिक रचनायें* भेजते रहें। रचनायें वर्ड में यूनिकोड फॉण्ट में टंकित होनी चाहियें । यह सुनिश्चित करने के लिये कि आपकी रचनायें साहित्यसुधा के आने वाले अंक में प्रकाशित हो जायें, कृपया माह के द्वितीय अंक के लिये 25 तारीख तक और प्रथम अंक के लिये 10 तारिख अपनी रचनायें अवश्य भेज दें इन तारीखों के बाद प्राप्त हुई रचनाओं पर समय और उपलब्ध स्थान के अनुसार ही विचार किया जायेगा।
 
यदि आप पहली बार रचना भेज रहे हैं और आपने अपना परिचय पहले नहीं भेजा हुआ है तो अपनी रचनाओं के साथ कृपया अपने चित्र के साथ अपना संक्षिप्त परिचय भी, जो वर्ड में यूनिकोड फॉण्ट में टंकित हो, भेजें।     
 
साहित्यसुधा’ को और लोकप्रिय बनाने के लिये और हिंदी साहित्य को अन्य रचनाकारों एवँ अपनी रचनाओं को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने के लिये कृपया इसके लिंक को अपने मित्रों को भी भेजें और उसकी एक प्रति मुझे भी अग्रेषित कर दें ताकि आने वाले अंकों की जानकारी उन्हें सीधे पहुंचाई जा सके  आपसे यह भी अनुरोध है कि इसका प्रचार फेसबुक एवँ अन्य सोशल मीडिया पर भी करें ताकि आपकी और अन्य रचनाकारों की कृतियाँ अधिक से अधिक लोग पढ़ सकें ।
 
कृपया ध्यान दें:- 

(i) बार-बार अनुरोध करने पर भी यह पाया गया है कि रचनायें/परिचय यूनिकोड फॉण्ट के बजाय कृतिदेव फॉण्ट में भेजी जा रही हैं। इससे एक ओर तो इन रचनाओं को यूनिकोड फॉण्ट में परिवर्तित करने में बहुत समय लगता है और असुविधा होती है, साथ ही साथ उनमें बहुत सी त्रुटियाँ रह जाती हैं जिससे रचनाओं के अर्थ भी बदल सकते हैं। इसलिये कई रचनाओं को ‘सहित्यसुधा में प्रकाशित करना मुश्किल हो जाता है। अत:, आपसे अनुरोध है कि https://microsoft-indic-language-input-tool-conf.software.informer.com/download/ लिंक पर जा कर टूल डाउनलोड करें और फिर यूनिकोड फॉण्ट में टाइप करके अपनी रचनायें/परिचय भेजें।

(ii) रचनाकारों से यह अनुरोध भी है कि अपनी रचनाएँ मेल की बॉडी में न भेजें। इससे फोर्मेटिंग सही नहीं हो पाती है और रचना की खूबसूरती नहीं बन जिससे पढ़ने वालों को रचना में कोई रुचि नहीं रह जाती। अत: अपनी रचनाएँ अलग से वर्ड डॉकयुमेंट में टाइप करें और उसे मेल के साथ संलग्न करें।

(iii) परिचय/रचनाओं/साहित्य समाचारों के साथ भेजे गए चित्रों की लंबाई-चौड़ाई  250px X 250px होनी चाहिए।

 
धन्यवाद!
 
डॉ० अनिल चड्डा
सम्पादक
साहित्यसुधा

 
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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

16.9.20

कवि संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " हिन्दी है हिन्दुस्तान की भाषा "














हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ   


हिन्दी है हिन्दुस्तान की भाषा


हिन्दी है हिन्दुस्तान की भाषा 
राष्ट्र की भाषा पहचान की भाषा 
जन -जन की भाषा गणतंत्र की भाषा 
साहित्य की भाषा साहित्यकार की भाषा 
आश और विश्वास की भाषा               
हिन्दी  तो है देश की भाषा 
पढ़ने की भाषा लिखने की भाषा 
गीत की भाषा संगीत की भाषा 
बोल की भाषा भरोस की भाषा
मातृभाषा वतन की भाषा 
कवियों की भाषा लेखक की भाषा 
सभी भाषाओं से प्यारी भाषा 
माँ की भाषा ममता की भाषा
सबके सम्मान सद्भाव की भाषा 
कलह दूर भगाती हिन्दी 
प्रेम पास लाती हिन्दी 
अपनो में विश्वास दिलाती हिन्दी 
संस्कार हमारी  संस्कृति हमारी 
पहचान हमारी  भाषा हिन्दी 
सब लोगों की भाषा प्यारी हिन्दी 
तुलसी कबीर संत महान 
सबने दी इसको पहचान 
कवि निराला, महादेवी वर्मा 
सबने किया हिन्दी का सम्मान 
अपनी लिपि अपनी भाषा
सबसे है सिर्फ एक आशा 
मिल-जुल कर करे प्रचार 
तब होगा मातृभाषा का प्रसार 
हिन्दी है हिन्दुस्तान की भाषा
राष्ट्र की भाषा पहचान की भाषा  **

                   - संगीत कुमार वर्णबाल 
                        जबलपुर 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.



15.9.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " कविता का सिरमौर " ( दोहा )



श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा - सतसई - " मेरी छोटी आँजुरी " से लिया गया है -


14.9.20

कवि - नंदन मिश्र का घनाक्षरी छन्द - " हिंदी जिंदगी है मेरी "




















 हिंदी जिंदगी है मेरी

         ( विधा :  घनाक्षरी छंद ) 

  
हिंदी से जिंदगी में सरलता सबलाता जी,
पूर्ण आत्मा सहज  संस्कार लगने  लगी।
मुरझाई थी सुमन कहीं  जिंदगी की मेरी,
तो हिंदी ही जीने का आधार लगने लगी।
पढ़  पढ़ के अंग्रेजी खुद से  बिछड़ गया,
तो  हिंदी जीने का व्यवहार लगने  लगी।
अनबन  खटपट  होने  लगी  जिंदगी में,
तब हिंदी  ज़िन्दगी में प्यार  लगने लगी।**

                      ✍️ नंदन मिश्र
                                 जहानाबाद, बिहार
                                📞 7323072443

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

13.9.20

सुनील कुमार शर्मा - " साहित्य - समाचार " हेतु |


कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - " संध्या " - ( एक )



कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - " अँधेरा बढ़ रहा है " से लिया गया है -












" संध्या " – (एक)

बैठ गयी है
ऊपर चढ़ कर धूप
          नीम पर ,
     लेकिन
     साड़ी का पल्लू
     लटका मुंडेर पर |

दिन भर
चल कर थका
और माँदा ये सूरज ,
फिसला चला जा रहा
घाटी की ढलान से |
     खेत चुग रहे पाखी
     अब उड़ चले गगन में ,
     जब कि चलायी गोफन
     संध्या ने मचान से |
बोझिल क़दमों लौट रही है
हवा भीलनी ,
अपने आँचल में
मादक महुआ समेट कर |
घनी झाड़ियों
अलसाया – ऊँघता पड़ा था
दिन भर रीछ – सरीखा तम ,
अब बढ़ा आ रहा |
     निकल – निकल कर
     अन्दर से आ रहीं तरैयाँ ,
     देख रहीं
     नंगा जंगल
     दूधों नहा रहा |
शहर बदर थी
जो वीरानी औ’ सूनापन ,
बस्ती में लाता
सन्नाटा उन्हें घेर कर | **

            - श्रीकृष्ण शर्मा 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

12.9.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " मुक्त छन्द के ओ जनक " ( भाग - 12 )


कवि श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -


11.9.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " मुक्त छन्द के ओ जनक " ( भाग - 11 )


कवि श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -



10.9.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " मुक्त छन्द के ओ जनक " ( भाग - 10 )


कवि श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " (  दोहा - सतसई ) से लिया गया है  -


9.9.20

संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " सरकार कुछ न सुन रही






















सरकार कुछ न सुन रही 

सरकार कुछ न सुन रही 
कान में रूई डाल बैठी है 
बेरोजगार सब बदहाल हुआ 
नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा 
सामने अंधेरा दिख  रहा
मन इधर-उधर भटक रहा 
सरकार कुछ न सुन रही 

आयोग, बोर्ड सब बंद पड़ा 
भर्ती अब न हो रहा 
तैयारी कर सब घर बैठ गया 
पीएससी, एसएससी का बाट जोह रहा 
विज्ञापन कब आयेगा 
विज्ञापन जो निकला भी 
परीक्षा अब न हो रही 
सरकार कुछ न सुन रही

बेरोजगार सड़क पर उतर पड़े 
थाली लोटा पीट रहे
सरकार का विरोध खूब हो रहा 
पर सरकार पर कुछ  असर न हो रहा 
रूप भयावह ले रहा 
युवा आवाज बुलंद कर रहा
सरकार कुछ न सुन रही 

पढना लिखना बेकार हुआ 
डिग्री ले ले झक मार रहा 
उपार्जन कुछ न हो रहा 
सपना चकनाचूर हुआ 
ख्वाब सड़क बिखर गया 
बीच सड़क पर आ गया 
सरकार कुछ न सुन रही 

घर घर कलह फैल रहा 
युवा घर में बैठ गया 
माँ बाप का बोझ बन गया 
विवाह प्रस्ताव भी न आ रहा 
परिवार बाट निहार रहा 
पर सामने कोई न दिख रहा 
सरकार कुछ न सुन रही **


                                 संगीत कुमार वर्णबाल 
                                  जबलपुर
                                 चलंतभाष - 9685761073

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

8.9.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " मुक्त छन्द के ओ जनक ! " ( भाग - 9 )



             कवि श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक -  " मेरी छोटी आँजुरी "  ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -


7.9.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " मुक्त छन्द के ओ जनक " - ( भाग - 8 )



      ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा – सतसई - ‘ मेरी छोटी आँजुरी ’ से लिया गया है )



6.9.20

कवि संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " कैसी ये दुनियाँ की रीत है "













कैसी ये दुनियाँ की रीत है


जीते जी न माँ बाप की सेवा करते 
मरते ही दूसरे को मेवा खिलाते 
दूसरे को दिखाने में क्यों लोग ऐसा करते हैं 
कहते, श्राध्य से पितर खुश होते हैं 
कैसी ये दुनिया की रीत है

ऐसी कुप्रथा को त्याज्य करना है 
जीते जी माँ बाप की सेवा करना है 
कष्ट कभी न उन्हें होने देना है 
हर मुसीबत में साथ उनका आयेगा 
इस पुण्य कार्य में लगे रहना है 
कैसी ये दुनिया की रीत है 

माँ बाप की सेवा में लगे रहना है 
कुछ खोना भी पड़े तो कोई बात नहीं 
वर्तमान में विश्वास करना है 
हर वक्त सेवा में तत्पर रहना है 
स्नेह सदैव उनका बना रहे
कैसी ये दुनिया की रीत है 

कभी न माँ बाप को बोझ समझना है 
उनको अपना धन दौलत समझना है 
हमेशा उनके साथ चलना है 
जीवन में आगे बढते रहना है 
तब सफलता मिल ही जायेगी 
कैसी ये दुनिया की रीत है  **

                - संगीत कुमार वर्णबाल
                        जबलपुर 
                        चलंतभाष -९६८५७६१०७३
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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " मुक्त छन्द के ओ जनक " ( भाग - 7 )

 

        ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा – सतसई - ‘ मेरी छोटी आँजुरी ’ से लिया गया है )






5.9.20

कवि संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " शिक्षक की महिमा "













(शिक्षक  दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ )


शिक्षक की महिमा


शिक्षक की महिमा क्या गाऊ शिक्षक तो महान हैं 
शिक्षक बिना न कोई शिक्षित हुआ 
हर कोई को मिला उनका वरदान है 
कमजोर मजबूत सब एक समान
सबको देते शिक्षा का दान
शिक्षक की महिमा क्या गाऊ शिक्षक तो महान

हर फूल को सीचने, माली की तरह विद्यालय बैठे हैं 
शिष्य के मन की बात खूब समझते हैं 
तम को दूर भगाते , शिक्षा की ज्योति जलाते हैं 
बच्चों का भविष्य बनाते, शिक्षक तो राष्ट्र निर्माता हैं
शिक्षक की महिमा क्या गाऊ शिक्षक तो महान हैं 

आधुनिक हो या पौराणिक शिक्षक बने शिक्षा के दाता
ज्ञान की बात बताते, शिक्षा का अलख जगाये हैं 
मन से अज्ञानता का डर दूर भगाते
बच्चों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश जलाते 
दुनिया में ज्ञान का प्रकाश फैलाते 
शिक्षक की महिमा क्या गाऊ शिक्षक तो महान हैं  **

                       - संगीत कुमार वर्णबाल 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

लघुकथाकार पवन शर्मा की लघुकथा - " आग "



पवन शर्मा 



                       आग

उसने दो रूपये का नोट निकालकर मोंटू के हाथ में थमाया और कहा ,  ‘ जल्दी में कोई चीज नहीं ला पाया ... ले लेना | ’  फिर भाभी के पाँव छुए और बाहर निकल आया |
          बाहर निकलते हुए भैया बोले, ‘ चल, तुझे बस स्टैंड तक पहुँचा दूँ |’
          ‘ मैं निकल जाऊँगा | आपके ऑफिस का समय हो रहा है | ’
          ‘ चल तो | ’
          भैया ने सड़क पर चलते – चलते पूछा ,  ‘ तेरा पोस्ट – ग्रेजुएशन पूरा हो गया ? ’
          ‘ हाँ | ’  उत्तर देते हुए वह विस्मित हो गया |
          ‘ अब आगे ? ’ 
          ‘ कुछ नहीं ... पूरी तरह घर पर बैठा हूँ | ’  कहते – कहते वह भीतर तक सिकुड़ गया |
          ‘ अम्मा और बाबू कैसे हैं रे ? ’  भैया ने पूछा |
          उसके भीतर भक्क से आग लगती है | पूरे तीन दिन से इनके यहाँ हूँ – अब चलते वक्त पूछ रहे हैं !
          ‘ ठीक हैं | ’  उसने अपने भीतर की आग दबाई |
          बस स्टैंड में घुसते हुए वह कहता है ,  ‘ बाबूजी कह रहे थे कि अब तीन सौ से घर का खर्चा नहीं चल पाता है – कुछ और भेज दिया करें | ’
          सामने खड़ी बस का नम्बर देख भैया कहते हैं , ‘ यही बस जायेगी | तू यहीं रुक – मैं टिकिट लेकर आता हूँ | ’
          उसे लगा कि भैया ने उसकी बात सुनी ही नहीं है – उसके भीतर की आग फिर से सुलगती है |
         थोड़ी देर बाद भैया हाथ में टिकिट लिए लौटे और बोले ,  ‘ तू बस में बैठ | मैं चलता हूँ | ’
         उसे टिकिट थमाते हुए भैया ने जेब में से पचास रुपये का नोट निकाला और उसकी ओर बढ़ाया ,  ‘ ले ... रख ले ... काम आएँगे | ’  भैया थोड़ी देर चुप रहे , फिर बोले , ‘ बाबूजी से कहना कि शहर में तो पानी भी खरीद कर पीना पड़ता है | ’
          उसके भीतर की आग न जाने क्यों एकदम ठंडी पड़ गई थी | **  

                 - पवन शर्मा  
                श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय ,
                        जुन्नारदेव , जिला - छिन्दबाड़ा ( मध्य प्रदेश )
                        पिन कोड - 480551 
                        फोन नम्बर - 9425837079  

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

4.9.20

कवि कमलेश शर्मा " कमल " की कविता - " मैं एक शिक्षक हूँ "




कमलेश शर्मा  " कमल "
















मैं एक शिक्षक हूँ


मैं एक शिक्षक हूँ , शिक्षा देना मेरा काम ।

गुरुजी ,अध्यापक , मास्टर ये भी मेरे नाम ।
मास्टर होते कंजूस , ऐसे नाम से भी बदनाम ।।

चाहे लाख काम करो , किसी को नहीं दिखता है ।
संतुष्टि के लिए रोज , डायरी में लिखना पड़ता है ।।

गर्मी हो या बरसात या , कड़ाके की हो सर्दी ।
ड्यूटी पर तैनात रहता , नहीं किसी को हमदर्दी ।।

MDM का स्वाद चखो , दूध में ना हो पानी ।
बावर्ची बने कभी , कभी ग्वाले सी कहानी ।।

हर विपदा में साथ खड़ा , बनकर कर्मयोगी ।
मेहनत से बनता है , सरकारी वेतनभोगी ।।

योजनाओं की कमी नहीं ,आदेश रोज नए आते हैं ।
सब काम छोड़ कर पहले , डाक तुरंत मंगवाते हैं ।।

पाठ पढ़ाओ, जाँच करो , लो फिर उसका एग्जाम ।
रिजल्ट कम आने पर , भुगतो फिर उसका परिणाम ।।

जनगणना या चुनाव हो , कितने आधार और खाते हैं ।
वृक्षारोपण , छात्रवृति , स्कूटी , सर्वे में घर घर जाते हैं ।।

शिक्षक ने बाबू , BLO , कभी चौकीदारी का काम किया ।
संकट की इस घड़ी में भी , शिक्षक ने योगदान दिया ।।

पगार कम हो या ज्यादा , ये कर्मों का फल होता है ।
वैसा ही पाता फल सदा , जो जैसा बीज बोता है ।।

शिक्षक बनकर हमने , नहीं कोई अपराध किया ।
धन्य है ईश्वर जो हमको , गुरु पद का सौभाग्य दिया ।।

फिर भी अपने कर्म को , देता रहूँगा अंजाम ।
मैं एक शिक्षक हूँ, शिक्षा देना मेरा काम ।। **


                        - कमलेश शर्मा  " कमल "

                                                           (अध्यापक) 
                                                           रा.उ.प्रा.वि. 
                                                           धुरावतों का खेड़ा,
                                                           ब्लॉक:-अरनोद,
                                                           जिला:- प्रतापगढ़ (राज.)
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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान

 ) , फोन नम्बर – 9414771867