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29.8.20

कवि नेमीचंद मावरी " निमय " की कविता - " होनी चाहिए तालाबंदी "



कवि नेमीचंद मावरी " निमय "

















होनी चाहिए तालाबंदी


होनी चाहिए तालाबंदी, 
हमारी बुराई की, 
हमारी हीन भावनाओं की, 
हमारी कृपणता की, 
हमारी तृष्णा और मोह की, 
हाँ  ! तालाबंदी होनी चाहिए। 

हमारे परहित उठे हाथ ना रुकें, 
हमारे इरादे किसी के आगे ना झुकें, 
लालच ना हो कभी मन में हमारे, 
कभी एक कदम भी पाप की ओर ना डगें। 
होनी चाहिए तालाबंदी! 
हमारे स्वार्थ की, 
हमारी रुग्णता की, 
हमारी रोती आँखों की, 
हमारे कलुषित आचरणों की, 
हाँ! तालाबंदी होनी चाहिए। 

हम जीयें मगर दूसरे के लिए, 
हम बढ़ें मगर सर्वहित में, 
हम त्यागें मगर परमार्थ के लिए, 
हम सहें मगर हम पर निर्भरों के लिए, 
होनी चाहिए तालाबंदी! 
हमारे भोगों की, 
हमारे असमय प्रेम प्रलापों की, 
हमारे बेवक्त बेवजह विलापों की, 
हमारे बेतुके बेमतलब के रागों की, 
हाँ ! तालाबंदी होनी चाहिए।   **

          - नेमीचंद मावरी " निमय " 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.





28.8.20

कवि - संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " पति-पत्नी "













पति-पत्नी


घर घर में होती एक बात 
पति -पत्नी रहते एक साथ 
बात बात में  जाते उलझ  
फिर भी दोनों  रहते एक साथ 
दोनों मिल जताते प्यार 
गले से गले  जाते मिल 
घर घर में होती एक बात 

कभी मिठा तो कभी खट्टा 
दिन रूठते रात मनाते 
नयन से नयन मिलाते 
फिर मिल साथ बाते करते 
एक दूसरे का हाल सुनाते 
प्रेम पूर्वक संगीत सुनाते
घर घर में होती एक बात 

जब श्रृंगार कर सजधज आती 
अधरों पे मुसकान ले आती 
नयनों पे काजल लगाती 
माथे पे बिंदी सजाती 
खुशियो की रौनक ले आती 
उर में प्रेम की बयार बहाती 
घर घर में होती एक बात 

हर्ष विषाद चलता रहेगा 
जीवन में स्नेह बढता रहेगा 
दोनों मिल साथ रहेंगे 
मरते दम तक एक रहेंगे 
कभी न टूटेगा ये बंधन 
बात बात में लड़ते रहेंगे 
घर घर में होती एक बात 
पति पत्नी रहते एक साथ  **

                 - संगीत कुमार वर्णबाल 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.




कवि - नेमीचंद मावरी " निमय " की कविता - " जिंदगी की सच्चाई "




 नेमीचंद मावरी " निमय " 









जिंदगी की सच्चाई


जहाँ कमाने की हमेशा उधेड़बुन सी रहती है, 
सदा भागकर आगे रहने की धुन सी रहती है, 
हफ्ते भर तक लोगों की जीन्स नहीं धुलती है, 
ऑफिस-ऑफिस खेलने में जिंदगी निकलती है । 

रात के दो बजे तो लोगों की साँझ ढलती है, 
तड़के चार बजे किसी की नींद नहीं खुलती है, 
वो सपनों की दुनिया अब गूगल पर मिलती है, 
इंटरनेट की दुनिया में अब टीवी नहीं चलती है। 

जुगाली करने को अब चने की जगह तंबाकू है, 
पब और पार्टियों में युवा पूरी तरह बेकाबू है, 
कानून और कायदे केवल शरीफों पर लागू है, 
फिसड्डी रहके भी नेता का बेटा बना बाबू है। 

खेत खलिहानों में शॉपिंग बाजारों की बस्ती है, 
आम आदमी की जिंदगी कुछ ज्यादा ही सस्ती है, 
अधिकारों के हकदारों के गले में बँधी रस्सी है, 
पहुँच उसी की सत्ता में जिसकी बड़ी हस्ती है। 

ये वो दौर है जहाँ रोज कई कलियाँ मुरझाई है, 
दारू पीकर लौटा मर्द खाता बीवी की कमाई है, 
एक तरफ जिम्मेदारियां दूसरी तरफ महंगाई है, 
मिठाई पसंद,करेला नहीं यही आज की सच्चाई है । **

                                    - नेमीचंद  मावरी " निमय " 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

27.8.20

कवि - नेमीचंद मावरी " निमय " की कविता - " निर्मूल "














निर्मूल


बादलों ने दस्तक दे दी है, 
मासूम से दिखने वाले मौसमी कीड़े, 
बाहर निकल धूप का आनंद लेने लगे , 
शाखें नई कोपलों से हरित हुई, 
बारिश से धुल हर पेड़ के पत्ते जवां हो गए, 
चहक- चहक घरों में दुबके पंछी, 
कभी तालाब, कभी मंदिर परिसर, 
तो कभी पहाड़ पर उगे ऊँचे पेडों की डालियों पर, 
अपने खुश होने का प्रमाण देने में लगे । 
धरती से उठने वाली तपन अब असहाय सी हो गई, 
निर्झर राग सुनाने को आमादा है। 
पुरवाई ने मन मोह लिया। 
दादर, झींगुर और खसारियाँ संगीतज्ञ बन गए। 
निम्बोलियाँ पीली हो धरती पर फिर से 
नन्हें-नन्हे पौधों में बदलने लगी है। 
घरों पर चाय और पकौड़े की मुँह में 
पानी लानी वाली महक अब तेज होने लगी है।
इन सबके बीच भीग रहे हैं दोस्त प्यार के रंग से। 
पुराने ठूँठ के हरे होने की कहानी सी हो गयी है दोस्ती। 
कभी बाढ़ भी आई, आँधियाँ चली, 
झंझावातों ने समूल नाश भी करना चाहा। 
मगर ठूँठ को आस रही, 
कोई आशापूर्ण करने वाले सावन की।
तपती धरा पर पानी की बूंदों की आवक हुई, 
और फिर से ठूँठ एक ही बार में जैसे जीवित हो गया। **



 - नेमीचंद मावरी " निमय "









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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

26.8.20

कवि संगीत कुमार वर्णबाल की कविता " हृदय की धड़कन मन का कंपन "













हृदय की धड़कन मन का कंपन

हृदय की धड़कन मन का कंपन
रोदन से अब भर गया 
जीवन चहुँदिस अवरूद्ध हुआ 
मन भ्रांति से काँप रहा
कोरोना का कहर खूब बढ रहा
हृदय की धड़कन मन का कंपन 
बेतहाशा जन जीवन बदहाल हुआ 
चहुँदिस मानव रोग से संक्रमित हुआ 
छुआ छूत खूब फैल रहा 
दवा सटीक न मिल रहा 
अनुमान पर सब चल रहा 
हृदय की धड़कन मन का कंपन 

भीड़ -भाड़ सब बढ रहा 
काम की ओर लोग दौड़ पड़े 
सामाजिक दूरी का न ख्याल रहा
लोग लोग से सट रहे
रोग देह -देह से  फैल रहा 
हृदय की धड़कन मन का कंपन 

बुढा जवान में  न फर्क रहा 
हर कोई संक्रमित हो रहा 
काल के मुँह में जा रहा 
घर परिवार बर्बाद हुआ
अपनो को लोग छोड़ चला 
हृदय की धड़कन मन का कंपन 
रोदन से अब भर गया **

             - संगीत सारंग 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

कवि नेमीचंद मावरी " निमय " की कविता - " जीना सीखा है "













जीना सीखा है

सस्ताई में महँगे का भी सौदा करना सीखा है, 
जमीं पे नीड़ बना मैंने अंबर में उड़ना सीखा है 
अब जीने की आदत को तू भले भुलाना चाहे जिंदगी, 
उठकर गिरना,गिरकर उठना, पर बस बढ़ना सीखा है। 

आँखों हँसती रही और आँसू को किया दफन  पीछे, 
दुत्कारा दुनिया ने भले, मगर अपनी नजरों में ना गिरा नीचे, 
सच्चाई से ना हटा कदम झूठे वार भी सहे कई बार, 
झुका ना पाए कोई तूफ़ाँ बना ना पाए कभी लाचार, 
फौलाद लिए हाथों ने सदा पत्थर को गढ़ना सीखा है, 
सागर की गहराई से जिंदगी पर्वत पर चढ़ना सीखा है।

पता नहीं क्यों इस जमाने में सदा दिखी चतुराई है, 
बहुत संभलकर रिश्ते बाँधे पर सबको लगी निठुराई है, 
कुछ खेमों की किस्सागोई बिसात मेरे जीवन में रच गई, 
ऐसा लगा जैसे कलियुग के ठेकेदारों की महफ़िल सज गई, 
आज अपने नहीं अपनों के लिए थोड़ा सा डरना सीखा है, 
हाँ! शत्रु नहीं कोई पर थोड़ा खुद से भी लड़ना सीखा है।  **



 - नेमीचंद मावरी " निमय "









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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

25.8.20

कवि नेमीचंद मावरी " निमय " की कविता - " कैसे बसंत बहारें मैं गाऊँ "














कैसे बसंत बहारें मैं गाऊँ


जब बोटी- बोटी खाने को कुत्ते 
सड़कों पर आमादा हों, 
जब भूख प्यास से तड़प रहा अपना, 
और भंडारों में दबाया आटा हो, 
जब राजा को तहस-नहस करने के, 
मंसूबे बनाता प्यादा हो, 
जब गौ को दी गई इक रोटी भी, 
गृहस्वामी को लगती ज्यादा हो, 
तब कैसे अपनी फटती छाती का 
दर्द लिए मैं छुप जाऊँ, 
तब कैसे लहू से स्याह कलम से, 
लिखने से मैं रुक जाऊँ। 

जब सावन की मद्धिम बारिश, 
तूफ़ाँ लाने के सपने देख रही हो, 
जब पुरवाई कोमल तन को, 
वैशाखी तपन सी सेक रही हो, 
जब मद्धिम हो जाए जलधि की लहरें, 
और आँचल में भूतल के छिप जाए, 
जब धवल चाँदनी इंदु की, 
देख समय को कुम्हला जाए, 
जब वीत राग की हो आहट
तो कैसे प्रीत राग को दोहराऊँ, 
जब घर के बाहर आग लगी हो, 
तो कैसे बसंत बहारें मैं गाऊँ। 

जब माटी का कण- कण भी, 
त्राहिमाम रुदन करने लगे, 
जब इस सृष्टि का नाद स्वयं भी, 
स्वकंपित स्वरों से डरने लगे , 
जब भूतल की अग्नि भी, 
काल की तपन से जलने लगे, 
जब सागर खुद हो जाए अधीर
और मरुधर पर बहने लगे, 
जब हवन कुंड बलिवेदी बन जाए, 
तो कैसे तपोवन अपना सजवाऊँ। 
जब जरा हो रही हो मेरी वसुधा, 
तो कैसे अपना यौवन दिखलाऊँ । 

जब सच्चाई झुठलाने को, 
सिर कटने की नौबत आ जाए, 
जब मेरे जिगर के टुकड़े में, 
शत्रु  की सोबत आ जाए, 
जब अपनी ही बस्ती पर, 
गणिका की तोहमत आ जाए, 
जब अपनी जमीं के बदले में, 
जीने की मोहलत आ जाए, 
तब कैसे अपनी साँसों को , 
गिरवी होने से बचा पाऊँ, 
तब कैसे जिल्लत के मंडप को, 
इज्जत से मैं सजा पाऊँ। **



  - नेमीचंद मावरी " निमय "












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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

कवि - नेमीचंद मावरी " निमय " का जीवन परिचय




नेमीचंद मावरी  " निमय "












जीवन परिचय - 

नेमीचंद मावरी " निमय " 
पुत्र -  श्री हुकमचंद मावरी 
जाति -  गुर्जर
निवासी -  बूंदी राजस्थान, भारत
संपर्क सूत्र -  9694676110,7014442615
FB page-  Thestarpoet"Nimay"

साहित्य परिचय -

कविता, हाइकु, शायरी, दोहे, मुक्तक व अन्य पद्य विधाओं में विभिन्न अंतर्देशीय पत्र पत्रिकाओं में लेखन व विभिन्न मंचों पर वाचन। 
अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति सम्मान, तुलसीदास साहित्य सम्मान, राज्य स्तरीय कविता वाचन सम्मान। 
स्वरचित काव्य संग्रह - काव्य के फूल -2013, अनुरागिनी :एक प्रेमकाव्य-2020, कोहरे की आगोशी में - मुद्रिकरण प्रगति में है। **

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संकलन - सुनील कुमार शर्मा , पी. जी.टी., जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला - सवाई माधोपुर ( राजस्थान ).

22.8.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - '' मुक्त छन्द के ओ जनक ! ( भाग - 6 )


           ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा – सतसई - ‘ मेरी छोटी आँजुरी ’ से लिया गया है )







21.8.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - '' बादल ''


( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक अक्षर और '' से लिया गया है )
















बादल

दिनभर
पश्चिम – डांड़े लटके
मधुमक्खी – छत्ते – से बादल |


          इधर – उधर
          मुँह मार रहीं अब
          बकरी औ’ भेड़ सी घटाएँ ,
          बिखरा रेबड़
          हाँक ला रहीं
          सांटे से गोंडनी हवाएँ ,
देखो ,
जुड़कर एक हो गये
मेले के जत्थे – से बादल |


          धमा चौकड़ी
          मची गगन में
          धूसर काले गज यूथों की ,
          ऐसी बाढ़
          कि धूप बह गयी ,
          डूब गयी बस्ती तारों की ,
पर
दहाड़ते , आँख दिखाते
ये उखड़े हत्थे से बादल | ** 



 - श्रीकृष्ण शर्मा 





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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन 

नम्बर– 09414771867

20.8.20

पवन शर्मा की लघुकथा - '' चोर निगाहें ''


                         ( प्रस्तुत लघुकथा – पवन शर्मा की पुस्तक – ‘’ हम जहाँ हैं ‘’ से ली गई है ) 



                   चोर निगाहें


उसने अपनी साइकिल पौरी में खड़ी कर दी और घर में घुस गया | हैंडिल पर सब्जी की थैली टंगी रह गई | भीतर दद्दा अपनी पुरानी इजीचेयर पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे | उसे देख दद्दा ने अखबार पढ़ना बन्द कर दिया और चश्मा उतारकर हाथ में ले लिया , फिर बोले ,  ‘ इधर आ आलोक , बैठ | ' 
          वह बिना कुछ कहे पास रखी कुर्सी पर बैठ गया | भीतर से अम्मा भी आ गई और दद्दा की बगल वाली कुर्सी पर बैठ गईं |
          ‘ तूने बहू को ज्वाइन करने के लिए मना कर दिया है ? '  दद्दा ने पूछा |
          ‘ आपको कैसे मालूम हुआ ? '
          ‘ बहू ने बताया | '
          वह चुप रहा | रसोई से उसकी पत्नी चाय ले आई | उसे , दद्दा और अम्मा को चाय देने के बाद पत्नी ने उससे पूछा ,  ‘ सब्जी लाए | '
          ‘ हाँ ! साइकिल के हैंडिल पर थैली टंगी है | '
          पत्नी पौरी में सब्जी की थैली लेने चली गई | दद्दा या भैया के सामने वह परदा नहीं करती है | दद्दा कहते हैं कि बहू उनकी बेटी है , फिर परदा कैसा ? कहीं बेटी भी अपने बाप के सामने परदा करती है !
          ‘ बड़ी मुश्किल से यह नौकरी मिली है | '
          वह फिर चुप रहा |
          ‘ कम – से – कम तेरा एस्टेब्लिशमेंट तो बेल – डेवलप्ड होगा | '  कहकर दद्दा ने चाय का घूँट भरा |
          ‘ आपका कहना ठीक है , किन्तु ... | '  उसने आगे की बात जानबूझकर अधूरी छोड़ दी |
          अम्मा उन दोनों के बीच पूरी तरह शांत बैठी हुईं चाय पी रहीं थीं |
          ‘ किन्तु क्या ? '
          ‘ मैं नहीं चाहता कि वह ये नौकरी करे | '
          ‘ क्यों ? ... क्या बुराई है ? और फिर इस नौकरी के लिए उसका सिलेक्शन पब्लिक सर्विस कमीशन से सेकिण्ड क्लास ऑफिसर के लिए हुआ है |' कहकर दद्दा ने चाय का आखिरी घूँट भरा और खाली कप टेबिल पर रख दिया|
          ‘ एक अपर डिविजन क्लर्क की पत्नी सेकिण्ड क्लास ऑफिसर हो – ऐसा तो ... | '  न जानें क्यों आगे के शब्द बोल नहीं पाया वह |
          उसने चोर निगाहों से देखा – अम्मा और दद्दा बिल्कुल शांत बैठे हैं , और उसकी पत्नी ... | **

 - पवन शर्मा 

पता
श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट  विद्यालय ,
जुन्नारदेव  , जिला - छिन्दवाड़ा ( म.प्र.) 480551
फो. नं. - 9425837079 .
ईमेल – pawansharma7079@gmail.com





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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन 

नम्बर– 09414771867
              

19.8.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - '' मुक्त छन्द के ओ जनक '' ( भाग - 5 )


     ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा की दोहा – सतसई - ‘ मेरी छोटी आँजुरी ’ से लिया गया है )