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21.8.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - '' बादल ''


( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक अक्षर और '' से लिया गया है )
















बादल

दिनभर
पश्चिम – डांड़े लटके
मधुमक्खी – छत्ते – से बादल |


          इधर – उधर
          मुँह मार रहीं अब
          बकरी औ’ भेड़ सी घटाएँ ,
          बिखरा रेबड़
          हाँक ला रहीं
          सांटे से गोंडनी हवाएँ ,
देखो ,
जुड़कर एक हो गये
मेले के जत्थे – से बादल |


          धमा चौकड़ी
          मची गगन में
          धूसर काले गज यूथों की ,
          ऐसी बाढ़
          कि धूप बह गयी ,
          डूब गयी बस्ती तारों की ,
पर
दहाड़ते , आँख दिखाते
ये उखड़े हत्थे से बादल | ** 



 - श्रीकृष्ण शर्मा 





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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन 

नम्बर– 09414771867

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