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8.4.21

कवि संगीत कुमार वर्णबाल की कविता - " हे मानव "

 















हे मानव 



हे मानव खुद बदलो
जग खुद बदल जायेगा
अपने किये हुए का ध्यान करो
विनम्र मन से विचार करो

अहम का त्याज्य करो
फल होने से पौधा खुद झुक जाता है
थोड़े से में ही न अभिमान करो
दुसरे की सिकायत करने पर न ध्यान दो

कर्म पर विश्वास करो
खुद लोग सम्मान करे
चापलूसी से न काम चलेगा
ईश्वर सब देख रहें

हे मानव खुद बदलो
जग खुद बदल जायेगा  **

                       - संगीत कुमार वर्णबाल 
                                       जबलपुर ( मध्यप्रदेश )
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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

7.4.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " होरी - सा जीवन गया " ( भाग - 14 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -