15.10.19

'' कण्ठ मेरा ''

 ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' बोल मेरे मौन '' से लिया गया है - )











कण्ठ मेरा 

आँसुओं से आज बोझिल 
कण्ठ मेरा रूंध गया है !!

बाँध टूटा आँसुओं का 
स्रोत ज्यों फूटा कुँओं का ,
किन्तु मेरे प्राण में है -
ताप क्यों जलती लुओं का ?

युग - युगों के वास्ते अब ,
खुले दुख के रास्ते जब ,

इक तुम्हारा द्वार मुझको
तब सदा को मुंद गया है  !

आँसुओं से आज बोझिल 
कण्ठ मेरा रूँध गया है !!

                   - श्रीकृष्ण शर्मा 

*********************************

( कृपया इसे Like, Follow कीजिए | आपके Comment का स्वागत् है | धन्यवाद | )


www.shrikrishnasharma.com

shrikrishnasharma696030859.wordpress.com



संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 0941477186


No comments:

Post a Comment

आपको यह पढ़ कर कैसा लगा | कृपया अपने विचार नीचे दिए हुए Enter your Comment में लिख कर प्रोत्साहित करने की कृपा करें | धन्यवाद |