6.10.19

'' गीतों के स्वर ''

(कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' बोल मेरे मौन '' से लिया गया है -)

 











गीतों के स्वर

गीतों के स्वर टूट रहे हैं || 

सुघर सलोने सपने मेरे ,
सुबह हुई तो झूठ रहे हैं |
गीतों के स्वर टूट रहे हैं ||

छाले दृग में पड़े , ज्योति 
आशा - विधुत की सहन नहीं थी ,
क्योंकि निराशा के तम की ही 
आँखें तो अभ्यस्त रही थी ;

रिसता है पानी , सुधियों के 
स्यात् फलोले फूट रहे हैं |
गीतों के स्वर टूट रहे हैं ||

              - श्रीकृष्ण शर्मा 
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर,राजस्थान,फोन नम्बर– 09414771867 




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