14.10.19

'' अग्नि – पंथ ''

( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' बोल मेरे मौन '' से लिया गया है -)












'' अग्नि – पंथ ''


मेरे प्यासे प्राण भटकते |

नभ में काले मेघ घुमड़ते ,
निर्झर - सरिता - सिंधु उमड़ते ,
पर्वत से बहता सोता है ,
मरुथल में भी जल होता है ,

पर मैं हूँ वह एक अभागा 
अग्नि - पंथ में ही जो जागा ;

शीतलता की खातिर जिसके 
बूँद -बूँद में प्राण अटकते |

मेरे प्यासे प्राण भटकते |

                  - श्रीकृष्ण शर्मा 

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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 0941477186





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