19.10.19

'' मैं रोता हूँ ''

 ( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' बोल मेरे मौन '' से लिया गया है - )

















मैं रोता हूँ !

दुनिया कहती मैं रोता हूँ !!

पर मैं नयनों की सीपी में ,
आँसू के मोती बोता हूँ !
दुनिया कहती मैं रोता हूँ !!

सब मेरा उपहास उड़ाते ,
किन्तु मूक मेरी वाणी है ,
रोक रहा जो कुछ कहने से 
वह इन आँखों का पानी है ;

समझो चाहे जो कुछ मन में ,
क्या रक्खा पर अवगुंठन में ,

इस गंगाजल से मैं अपने 
युग - युग के कल्मष धोता हूँ !
दुनिया कहती मैं रोता हूँ !!


                     - श्रीकृष्ण शर्मा 

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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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