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8.10.19

'' स्वर गीले हैं ''


( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' बोल मेरे मौन '' से लिया गया है - )









स्वर गीले हैं 

अभी गीत के स्वर गीले हैं ||

अभी प्रीति के बंधन भी तो 
लगता है ढीले - ढीले हैं |
अभी गीत के स्वर गीले हैं ||

अभी टीस खामोश नहीं हैं ,
बुझे हुए प्राणों में सुधि की 
चिनगी भी बेहोश नहीं है ;

दृग में अभी विषाद भरा है ,
सच मानो , उस दिन का अब भी 
मेरे दिल का घाव हरा है ;

आँखों की शबनम के भी तो 
रंग अभी नीले - पीले हैं |
अभी गीत के स्वर गीले हैं ||

         - श्रीकृष्ण शर्मा 
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www.shrikrishnasharma.com
shrikrishnasharma696030859.wordpress.com

संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867 



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