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21.9.21

श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - “ देवी तुम्हें प्रणाम् ! ” ( भाग - 4 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




19.9.21

पवन शर्मा की कविता - " रोती हुई लड़की "

 यह कविता , पवन शर्मा की पुस्तक - " किसी भी वारदात के बाद "  से ली गई है -











रोती हुई लड़की 


लड़की कुनमुनाने लगी 

लड़की रोने लगी 


माँ थपकी देती है 

सुलाने की कोशिश करती है 

लड़की रोती है , रोती ही जाती है 

माँ झल्लाती है -

नाशपीटी चुप हो जा 

दाढ़ी वाला बाबा आ जायेगा


लड़की चुप नहीं होती 

नहीं डरती दाढ़ी वाला बाबा से 


खुलता है दरवाजा भड़ाक से 

लड़की देखती है लड़खड़ाते कदमों को 

लाल - लाल मिचमिची आँखों को 


लड़की सहम जाती है 

रोती हुई चुप हो जाती है 

डरती है लड़की अपने पिता से !  **


                                  - पवन शर्मा 

पता -

श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय

जुन्नारदेव , जिला – छिंदवाड़ा ( मध्यप्रदेश )

फोन नम्बर –   9425837079

Email –    pawansharma7079@gmail.com   

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


नरेंद्र कुमार आचार्य की कविता - " शान हमारी हिंदी तब बनेगा भारत महान " -

 











शान हमारी हिंदी तब बनेगा भारत महान 




धोती कुर्ता  छोड़  जींस  अपनाई।  
छाछ लस्सी छोड़ कोला अपनाई।
अंग्रेजी   को  छोड़  क्यों  न  हम ।
विश्व में हिंदी की पहचान  बनाए ।

सब  अंग्रेजी  के  पीछे  भागे ।
पागल   है   दीवानों      जैसे ।
दीवानापन    दिखाएँ     हम ।
क्यों न हिंदी को आगे  बढ़ाएँ

बोली भाषा में हिंदी  को अपनाए।
अपने  मन  में  हिंदी  को  समाए।
और भाषा को जगह  न  दे  हम ।
क्यों न  हिंदी  का  गौरव  बढ़ाएँ ।

जिसने  हमको  बोलना  सिखाया।
जिसने     है     संस्कार      दिया ।
अपने   संस्कारों   से   ही    यारो ।
देश अपना हिंदी भाषी कहलाया ।

उत्तर से दक्षिण तक  फैलाए ।
हिंदी   की   अलख     जगाए ।
क्षेत्रीय भाषाओं को छोड़ कर।
हिंदी से देश को  एक  बनाए ।

इन   नेताओ   के   चक्कर    में ।
अलग   अलग  बोली  भाषा   में ।
अपनी    पहचान    को   भुलाए ।
क्यों ना एक अखंड भारत बनाए।

                 - नरेंद्र कुमार आचार्य 
                    संखना टोंक 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

18.9.21

डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ’ की रचनाएँ - “अतीत तो अतीत था”, “अब तो ठान ली” तथा “छेड़न लगे बिन बात साँवरिया” -

 

प्रिय बंधुवर,

अपनी नई रचनाएँ – “अतीत तो अतीत था”, “अब तो ठान ली” तथा “छेड़न लगे बिन बात साँवरिया” प्रस्तुत कर रहा हूँ। कृपया निम्लिखित लिंकस पर जा कर सुनें एवं अपनी प्रतिकृया दें।
 

कृपया चैनल पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त करें।


धन्यवाद!

डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ’
संपादक, साहित्यसुधा

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


17.9.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का गीत - " कौन जाने ? "

 यह गीत , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " फागुन के हस्ताक्षर " ( गीत - संग्रह ) से लिया गया है -











कौन जाने ?

( शरद् पूर्णिमा की रात को ताज की पृष्ठभूमि में लिखित )


गीत तो गाये बहुत जाने - अनजाने ,

स्वर तुम्हारे पास पहुँचे या न पहुँचे , कौन जाने ?


उड़ गये कुछ बोल जो मेरे हवा में ,

स्यात् उनकी कुछ भनक तुमको लगी हो |

स्वप्न के निशि - होलिका में रंग - घोले ,

स्यात् कोरी नींद की चूनर रंगी हो |


भेज दी मैंने तुम्हें लिख ज्योति - पाती ,

साँझ - बाती के समय दीपक जलाने के बहाने !

गीत तो गये  बहुत ...


ये शरद् का चाँद सपना देखता है ,

आज किस बिछुड़ी हुई मुमताज का यों ?

गुम्बदों में गूँजती प्रतिध्वनि उड़ाती ,

आज ये उपहास हर आवाज़ का क्यों ?


संगमरमर पर चरन ये चाँदनी के ,

बुन रहे किस रूप के रंगीन ताने और बाने ?

गीत तो गये बहुत ...


छू गुलाबी रात का शीतल - सुखद तन ,

आज मौसम ने सभी आदत बदल दी |

ओस - कन में दूब की गीली बरौनी ,

छोड़ कर ये रिमझिमें किस ओर चल दीं ? 


कौन - सी धरती सुलगती देख कर के ,

आज बादल बन गये हैं इस धरा को ही वीराने ?

गीत तो गाये बहुत ...


प्रात की किरनें कमल के लोचनों में ,

और धुँधला शशि हुआ जाता दिए में |

रात का जादू मिटा जाता इसी से ,

एक अनजानी कसक जगती हिये में |

ग्रह - उपग्रह टूटते टकरा सपन के ,

जबकि आकर्षण पड़े हैं सौरमण्डल के पुराने !

गीत तो गाये बहुत जाने - अनजाने ,

स्वर तुम्हारे पास पहुँचे या न पहुँचे , कौन जाने ?  **


                                    - श्रीकृष्ण शर्मा 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

12.9.21

कवि कमलेश शर्मा "कमल" की कविता - " राम से बड़ा राम का नाम है "

 














राम से बड़ा राम का नाम है 


राम से भी बड़ा राम का नाम है।
बन रहा अवध में राम का धाम है।।
आज मरते हे जो महलों के लिए,
जो महल छोड़ दे वो मेरे राम है।।

कण कण में बसे, तृण तृण में मिले।
राम तो निषाद और सबरी को मिले।।
छोड़ कर जात और पात के भेद को,
झूठे बेरों को खाते वही तो राम है।।

चाहे कोई भी पथ हो, कोई काम हो।
जानकी जैसा मुँह पर एक नाम हो।
एक नजर से तो देखो हनुमान की,
सबके मन में विराजे प्रभु राम है।।


भक्ति हो ऐसी, जैसे निष्काम है।
त्याग भाई सा हो, कितना सम्मान है।।
पितु वचन को निभाने वन को गए,
ऐसे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम है।।  **

                    - कमलेश शर्मा "कमल"
                                         मु. अरनोद, जिला-प्रतापगढ़ (राज.)
                                         9691921612


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 संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

कवि नरेंद्र कुमार आचार्य की कविता - " शान हमारी हिन्दी " -







 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ’ - “यूँ ही दिन के उजाले जलाते रहे”

 





प्रिय बंधुवर,

अपनी एक नई रचनाएँ – “यूँ ही दिन के उजाले जलाते रहे” प्रस्तुत कर रहा हूँ। कृपया निम्लिखित लिंकस पर जा कर सुनें एवं अपनी प्रतिकृया दें।
 
 


धन्यवाद!

डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ’
संपादक, साहित्यसुधा


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.



5.9.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा – “ देवी तुम्हें प्रणाम् ! ” ( भाग - 3 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




3.9.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का गीत - " व्यथा अँगड़ाई "

 यह गीत , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " बोल मेरे मौन " ( गीत - संग्रह ) से लिया गया है -











व्यथा अँगड़ाई 


प्राणों की इस पर्णकुटी में ,

इतनी पीर समाई कैसे ?

घृणा - उपेक्षा सहकर भी यह 

व्यथा आज अँगड़ाई कैसे ?


कितनी बरती थी होशियारी ,

कितनी गर्द - गुबार बुहारी ,

ख्वाहिश को बंदी रख कर की 

भावुक मन की पहरेदारी ;


पर किस दुर्बलता के पल ने ,

किस छलना के निर्मम छल ने ,


आँसुओं की बाढ़ में न जाने ,

यह ज्वाला सुलगाई कैसे ?

प्राणों की इस पर्णकुटी में ,

इतनी पीर समाई कैसे ?  **


                       - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

1.9.21

डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ’ की कविताएँ - " “हूँ गलती अपनी जानता” तथा “प्यार क्यों नफरत में बदल जाये”

 


 प्रिय बंधुवर, 

      अपनी 2 नई रचनाएँ – “हूँ गलती अपनी जानता” तथा “प्यार क्यों नफरत में बदल जाये” प्रस्तुत कर रहा हूँ। कृपया निम्लिखित लिंकस पर जा कर सुनें एवं अपनी प्रतिकृया दें।

  1. https://youtu.be/jViny--Kn7I
  2. https://youtu.be/QpR0kmxbMcg

      कृपया चैनल पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त करें। 

 

 

       धन्यवाद !



   डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ’ 

संपादक, साहित्यसुधा




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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.



 

31.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - “ देवी तुम्हें प्रणाम् ! ” ( भाग - 2 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




28.8.21

पवन शर्मा की कविता - " हौसला "

 यह कविता , पवन शर्मा की पुस्तक -  " किसी भी वारदात के बाद "    ( कविता - संग्रह )   से लिया गया है -











हौसला 


देखो , तुम सब लोग 

आँखें खोलकर देखो 

और सुनो उसकी चीखें 

क्या तुम्हें नहीं लगता कि

उसकी चीखों से आसमान फट पड़ेगा 

तार - तार हो गए हैं उसके कपड़े 

और शरीर से रिस रहा है खून 

बिलबिला रहा है 

कोलतार की सड़क पर पड़ा 


देखो तुम सब लोग 

कैसी मर्दानगी दिखा रहा है 

मूँछें ऐंठ रहा है और सड़क पर 

बार - बार डंडा पटक रहा है 

लगता है 

मांद से शेर निकल कर 

घूम रहा है 

बिछा दिया है उसने सड़क पर 

एक भरा - पूरा आदमी 

ऐसे ही तो बिछाते थे क्रूर शासक 

अपनी निरीह प्रजा को 


हैरान हूँ मैं 

तार - तार आदमी 

थरथराता हुआ खड़ा हो गया है फिर 

मुमकिन है 

उसकी शिराओं में रक्त 

जैसे मुरझाया पौधा पानी पाकर 

तन रहा है -- आंधी के मुकाबले के लिए 

उसकी शिराओं में 

अजीब हौसला बहने लगा है   **


                                   - पवन शर्मा 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

26.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " कविता - कहानी "

 यह कविता , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( कविता - संग्रह ) से ली गया है -











कविता - कहानी 


अनुभूतियों से गुजर कर 

बनते हैं शब्द 

कविता |


...और 

गुजर कर अनुभवों से 

इंसान 

कहानी |  **


             - श्रीकृष्ण शर्मा 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


24.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा – “ देवी तुम्हें प्रणाम् ! ” ( भाग - 1 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी  छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




22.8.21

कवि मुकेश गोगड़े की कविता - " राखी की हिफाज़त "

 

रक्षाबंधन की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।।   
















राखी की हिफाज़त













बेख़ौफ घर से निकलने का वादा मांगती है।
बहन क्या इतना सा भी ज्यादा मांगती है।
जमानेभर में प्रसारित ख़बरों को देखकर।
कलाई की राखियां भी हिफाज़त मांगती है।।

क़दम से क़दम मिलाकर जीत दिलाती है।
बेसुरे अल्फाज़ो को भी सुरीला बनाती है।
प्रीत के सरोवर में इतनी कलुषिता देखकर।
कलाई की राखियां भी हिफाज़त मांगती है।।

कोख में घुटती सांसे भी रिहाई मांगती है।
भाई-बहन का समान अधिकार मांगती है।
पौरुष प्रधानता का इतना ढ़ोंगीपन देखकर ।
कलाई की राखियां भी हिफाज़त मांगती है।।

प्रीत के धागों में कितनी सत्यता वो जानती है।
सौतेला व्यवहार देखकर भी दुआएं मांगती है।
बंजर हो जाएगा जहाँ,माँ, बहन,बेटी के बिना।
कलाई की राखियां भी हिफाज़त मांगती है।।

                             - मुकेश गोगड़े

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21.8.21

कवि चमन ' भारतीय ' की कविता - " एक बहन का प्यार अपने फौजी भाई के नाम ! "

 











एक बहन का प्यार अपने फौजी भाई के नाम !  


दिल में हैं बहुत अरमान
पर तुम हो सीमा पर जवान
देश की रक्षा की ख़ातिर
तुमने जो ये क़सम खाई है
हमने भी इस रक्षा बंधन पर सौगन्ध यह खाई है
देश के प्रति कर्तव्य
हम भी निभायेंगे
तुम हो सीमा पर तो
देश यह है सुरक्षित है
इस रक्षा बंधन पर हम
उनके लिए थाल सजाये बैठे हैं 
जो मातृ भूमि की खातिर
अपना शीश नवाएँ बैठे हैं  !  **


                       - चमन 'भारतीय'

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20.8.21

पवन शर्मा की लघुकथा - बेकारी में "

 यह लघुकथा पवन शर्मा की पुस्तक - " हम जहाँ हैं " ( लघुकथा - संग्रह ) से लिया गया है -





बेकारी में 


उसके साथ अक्सर ऐसा ही होता है , लगभग रोज - रोज !
          हो भी क्यों नहीं | कुछ करता भी तो नहीं है | भाई के पैसों से कब तक घर चलता रहेगा ? पापा हैं जो ' घोटाले ' में पकड़े गए | पापा कहते हैं - " इंजीनियरों ने खाया ' और पूरा उनके मत्थे मढ़ दिया ! ' जो भी हो | अब तो सस्पेंड होकर घर में बैठे हैं |
           वह रसोई में जाता है मम्मी रोटियाँ बना रही हैं | वह कहता है ,  ' देखो मम्मी , पापा को समझा दो | रोज - रोज की चख - चख मुझे पसंद नहीं है ... मुझे भी तो चिंता है | '
          पापा ने शायद सुन लिया | वह रसोई के दरवाजे पर हाथ टिकाकर बोले,   ' चिंता होती तो कोशिश करता | समझा ! बैठे - बैठे रोटियाँ थोड़े ही तोड़ता ! ' 
          ' ... और आप ? ' गुस्से में वह भरभरा जाता है |
          अचानक मम्मी रोटी बेलना छोड़कर खड़ी हो गईं | पापा जा चुके थे ... |  ** 


                                        - पवन शर्मा 

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पता -

श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय

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18.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " “ लाड़ - लढैती बेटियाँ ” ( भाग - 10 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




16.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " धूप "

 यह कविता श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( कहानी - संग्रह ) से लिया गया है -











धूप 


गिर पड़ी 

सहसा फिसल कर 

उतरती हुई धूप |


और 

फैल गयी 

नयी - नयी सम्भावनाओं की तरह |


गिरा हुआ आदमी 

धूप क्यों नहीं बन पाता भला ?  **


                               - श्रीकृष्ण शर्मा 


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14.8.21

डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ’ का कविता संकलन - " “मन के मनके”

 


प्रिय बंधुवर,
            
       मेरा नया कविता संकलन “मन के मनके” प्रकाशित हुआ है। कृपया निम्लिखित लिंकस पर जा कर मेरे नये कविता संकलन "मन के मनके" का अवलोकन करें और पुस्तक आर्डर करके मेरी कविताओं की समीक्षा करें एवं अपनी टिप्पणी दें।

  • Notion Press:

https://notionpress.com/read/man-ke-manke-1354252

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       धन्यवाद!
 
डॉ० अनिल चड्डा ‘समर्थ
संपादक, साहित्यसुधा

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12.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा – “ लाड़ - लढैती बेटियाँ ” ( भाग - 9 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




10.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का दोहा - " “ लाड़ - लढैती बेटियाँ ” ( भाग - 8 )

 यह दोहा , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है -




8.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " सामर्थ्य "

 यह कविता , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( कविता - संग्रह ) से ली गई है -












सामर्थ्य 


ऊपर 

देखता हुआ 

सोच रहा था मैं -

शायद 

आकाश से बड़ा 

कुछ नहीं है |


तभी 

मैंने बड़े अचरज से देखा -

एक चिड़िया आयी

और पार निकल गयी |   **


                     - श्रीकृष्ण शर्मा 


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6.8.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा की कविता - " तूफ़ान "

 यह कविता , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अक्षरों के सेतु " ( कविता - संग्रह से ली गई है -












तूफ़ान 


जंगल के इस कौने में 

रात भर प्रेत नाचते रहे |


उनसे 

सहमी हवा 

अन्दर आने को 

घर - घर साँकल खटखटाती 

दरवाजे भड़भड़ाती 

और 

चीखती - चिल्लाती फिरी |  **


                  - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.