3.3.20

इतनी आग कहाँ से लाये ?













( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत संग्रह - '' एक नदी कोलाहल '' से लिया गया है )


इतनी आग कहाँ से लाये ?

इतनी आग 
कहाँ से लाये ?
जो सूरज - जैसे गरमाये !

पुरखे तो थे 
गाय - सरीखे ,
सीधे - सादे ,
जी के नीके ;
खेल भाग्य का 
समझ जिन्होंने ,
जुल्म सहे , अन्याय उठाये !

बीज वही ,
जड़ वही तुम्हारी 
मिली कहाँ से 
फिर अय्यारी ?
सुर्ख लौह बन ,
काले तम के 
परबत मोम - सरीखे ताये !

          - श्रीकृष्ण शर्मा 
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www.shrikrishnasharma.com





संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिला– सवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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