11.8.20

कवि अयाज़ ख़ान की कविता - '' औरत ''
















औरत 
औरत एक अधजली पाण्डुलिपि है
मर्द एक टूटा हुआ क़लम
गुफ़ा युग के अँधेरे में
किन्नर की तालियाँ गूँजती हैं
लेकिन उस किन्नर ने
भगवान के हत्यारों के देश में
जन्म लिया है।

औरत के मायने है- वस्तु या मवेशी
जितना दिल चाहे रखो
जैसा दिल चाहे इस्तेमाल करो
औरत मर्द का लिबास है
जब दिल चाहे पहनो
मैला हुआ तो उतार फेंको।
औरत की बेबसी देखकर
बेड़ियाँ सिसक पड़ी
औरत ख़ुदा का तोहफ़ा है
पैग़म्बर को भी औरत ने
जन्म दिया है
लेकिन आज भी औरत को
ज़िन्दा जलाया जा रहा है।

फूल जैसी औरत के साथ
ज़्यादती करने वाला मर्द
देशद्रोही नहीं तो फिर क्या है?
औरत एक ज्वलंत प्रश्नचिन्ह है।

क़ुरआन की बहुत-सी आयतों में
औरत के बारे में अज़ीम बातें लिखी है
औरत का नाम क़ुरआन की आयत
पे रखा जाता है
औरत घर की जन्नत होती है
लेकिन आज भी औरत को
अत्याचार की सूली पर
चढ़ाया जा रहा है।
किसी जर्जर क़ुरआन की
ख़ुश्बू है औरत।

कुसंस्कृति के मरूस्थल में
औरत एक शीतल नदी है
नदी, जिसकी पूजा की जाती है
और जिसे पचासों मीटर
चुनरी ओढ़ायी जाती है
दूसरी तरफ़ औरत की चुनरी को
तार-तार किया जाता है
दरिन्दों की तरह
औरत को औरत नहीं बल्कि
कुछ और बनाया जा रहा है।

अन्याय करना गुनाह है
अन्याय सहकर ख़ामोश रहना
उससे भी बड़ा गुनाह
औरत अब यह बात
अच्छी तरह समझ चुकी है।
औरत कोई ग़ज़ल नहीं
एक ललकार है, एक चीख़ है
सुलगती धूप में खड़ी पहाड़ी का
दूसरा नाम औरत है।

कविताओं की तरह
दुर्लभ हो रही है औरत
क्योंकि औरत एक अधजली पाण्डुलिपि है
औरत एक अधजली पाण्डुलिपि है। **


   - अयाज़ ख़ान
        मकान संख्या ११४
               सग्गम मस्ज़िद के पास
               महाराणा प्रताप वार्ड
               क्रमांक ११
               जुन्नारदेव ४८०५५१
               ज़िला छिन्दवाड़ा
               मध्य प्रदेश
               ९०९८९०९१५८




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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन 

नम्बर– 09414771867

1 comment:

  1. अच्छी कविता है अयाज खान की.. बधाई..

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