30.5.20

पवन शर्मा की लघुकथा - '' अपराध बोध ''



                     ( प्रस्तुत लघुकथा – पवन शर्मा की पुस्तक – ‘’ हम जहाँ हैं ‘’ से ली गई है )  





                   अपराध – बोध

चाचाजी ने अपनी कमीज़ उतार ली , फिर दोनों पैर मोड़कर सोफे पर पालथी मार कर बैठ गए | उसे अटपटा लगा , किंतु चुप रहा | वह देख रहा है – चाचाजी बार – बार ड्राइंग – रूम को चोरी – चोरी देख लेते हैं | शायद वे ड्राइंग – रूम की भव्यता को देख रहे हैं | उसे बैचेनी होती है कि दोनों के बीच मौन का सिलसिला टूट क्यों नहीं रहा है ?
          ‘ बीमार थीं ? '  चाचाजी ने मौन तोड़ा |
          ‘ नहीं ... बुढ़ापे का शरीर था | '
          ‘ भाभी ने अपनी जिनगी में बेजा दुःख झेले | '
          वह चुप रहा | अपने पिता की मौत के बाद के दिन वह भी नहीं भूला है | कितने कष्टों में बीते है उसके वे दिन ! अभी भी याद है | यदि चाचाजी ने उसे और अम्मा को सहारा नहीं दिया होता तो वह सिर्फ़ गाँव का ही होकर रह गया होता | अम्मा चाचाजी की हमेशा ऋणी रहीं | एक बेसहारा औरत और उसके बच्चे को आसरा दिया | तभी तो सारी जिन्दगी अम्मा ने गाँव में ही बिता दी | साल भर पूर्व ही पुत्र – मोह में फँसी वे उसके पास चली आईं |
          ‘ तूने मोए ख़बर तक नई करी | '  चाचाजी ने कहा |
          ‘ समय नहीं मिल पाया ... कहीं भी ख़बर नहीं दे पाया | '
          ‘ सारी जिनगी उनकी सेवा करी | '  वह महसूस करता है कि चाचाजी की आवाज में बेहद पीड़ा है ,  ‘ आखिरी समय में भाभी ऐ देख नई पाओ मैं | '
          ‘ यही बात आपके लिए कहते – कहते अम्मा चली गईं | '  वह कहता है |
          कहने के बाद उसे लगता है कि वह किसी अनजाने अपराध – बोध से दबा जा रहा है | **

        

        - पवन शर्मा 











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पता
श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट  विद्यालय ,
जुन्नारदेव  , जिला - छिन्दवाड़ा ( म.प्र.) 480551
फो. नं. - 9425837079 .
ईमेल – pawansharma7079@gmail.com

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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई

 माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867



2 comments:

  1. बहुत सुंदर लघुकथा।

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  2. नितीश जी बहुत - बहुत धन्यवाद |

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