18.5.20

कवि कमलेश शर्मा '' कवि कमल '' की कविता - '' शराब ''













शराब

देखो आज भीड़ मची है, मधुशाला की क्यारी में । 
चौराहे पर पुलिस खड़ी है , अपनी ही खुद्दारी में ।।

राशन के पैसे नहीं जिनपे , भूखे पेट जो सोते हैं  ।
लंबी लाइनों में लगकर, महंगी शराब वो पीते हैं ।।

कहते हे दे रहे योगदान , देश की अर्थ व्यवस्था में।
पीना क्या  जरुरी है ,  आज की ऐसी अवस्था में ।।

निपट  लेते  हम भयंकर  ,   इस  महामारी से ।
पर कैसे निपटेंगे हम, इस शराब की लाचारी से।

महामारी के इस काल में, इतना क्या जरुरी था।
राशन लाने से पहले ,  पीना  बहुत  जरुरी था ।।

एक - एक पैसे की खातिर, कितना सब तड़पते हैं ।
दो घूँट  पीकर ऐसे  ही ,  कितना  वो  अकड़ते हैं ।।

आदेश एक ऐसा निकालो, विनती है प्रशासन से।
पहले निपटो आज के ,  इस मौत के दुशासन से।

बीवी , बच्चे और  सभी  घर  पर ,  करते  इंतज़ार हैं ।
संभल जाओ देश के युवा, गर तुमको उनसे प्यार है।।



-कमलेश शर्मा "कवि कमल " 
               मु. पोस्ट:- अरनोद, जिला:- प्रतापगढ़ (राज.)

             mob.9691921612








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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई 

माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867


1 comment:

  1. बहुत सुन्दर नीतिपरक सीख है आपके सृजन में । अत्यंत सुन्दर
    रचना ।

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