14.5.20

कवि कमलेश शर्मा "कमल" की कविता -''मजदूर हूँ मैं,पर मजबूर नहीं ''












मजदूर हूँ मैं , पर मजबूर नहीं


मजदूर हूँ  मैं , पर मजबूर नहीं ।
मेरी  गरीबी  कोई कसूर नहीं ।।

था में बहुत थका हारा, बेबस लाचारी का मारा ।
पेट की आग के खातिर, फिरा में पग - पग जग सारा ।।

जाने कई महलों में, मेरा बहा पसीना था ।
सपने बड़े दिखाकर, हमसे सब कुछ छीना था ।।

ना नाम मेरा, ना काम मेरा ।
बस केवल इस्तेमाल मेरा ।।

रोटी के टुकड़े के कारण, टुकड़े टुकड़े आज हुआ ।
भूखे चलते - चलते आज , पाँव  से मेरे लहू बहा ।।

ना साधन, ना सुविधा,  न कोई हमदर्दी है ।
चारों तरफ फैली केवल, मौत की दहशत गर्दी है ।।

सर पर बोझ उठाये है, कंधों पर जिम्मेदारी है ।
लौट चले पैदल ही घर को,  हिम्मत नहीं हारी है ।।

सुन लो दाता मेरी, मानकर फरियाद सही ।
मजदूरों के काम की, आएगी सबको याद कही।।

मजदूर हूँ मैं  , पर मजबूर नहीं ।
मजदूर हूँ मैं , पर मजबूर नहीं ।। **

 - कमलेश शर्मा "कमल ''
          (अध्यापक)
         मु.पोस्ट:-अरनोद,जिला:-प्रतापगढ़(राज.)
          मो.9691921612






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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई

 माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867


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