2.5.20

श्रीकृष्ण शर्मा - '' अपनी कहानी ''











अपनी कहानी 
 

अपनी तो मीता रे ,
बस यही कहानी !

पत्थर के कोयलों के 
धूएँ से भरी रही ,
सुबह - शाम घुटती रही 
शापित ज़िन्दगानी !

कोल्हू के बैलों पर 
जुए - सी धरी रही ,
दिन औ '  रात छाती पर 
चिन्ता की धानी !

बचपन में लगी चोट 
जीवन - भर हरी रही ,
पर न दिखी ऊपर 
उस चोट की निशानी !

सुख का तिनका भी जब 
बचा न तो डरी रही ,
स्वप्न तक में कच के लिए 
व्यथित देवयानी !

अघटित भी घटित देख 
मरी - सी पड़ी रहीं ,
हृदयघात - पीड़ित ये 
साँसें शाहजहाँनी !

          - श्रीकृष्ण शर्मा 
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई

 माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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