19.5.20

कवि संगीत कुमार की कविता - '' नेह ''














नेह

नेह निहारे स्वप्न सजाये।
सखी कब तुम आओगी ।। 
अपनी बातें तुझे  बताऊँ  । 
प्रेम रस  कब  लाओगी । । 
नेह निहारे स्वप्न सजाये । 

आँखों की पलकों पे सजाऊ। 
मिलने अब कब आओगी ।। 
बीती बातें फिर,कब हमें बताओगी। 
साथ फिर कब तू आओगी।। 
नेह निहारे  स्वप्न  सजाये । 

प्रेम रस उर में  संजोये । 
गले कब लग जाओगी।। 
हाथ   में    हाथ    रखे  । 
प्रेम पथ पर कब आओगी।। 
नेह निहारे स्वप्न  सजाये । 

नेह    का   दीप   जलाये  । 
तिमिर  कब  मिटाओगी ।। 
प्रेम रस का  अलख जगाने। 
फिर मिलने कब आओगी।। 
नेह निहारे स्वप्न  सजाये । 

प्यार    की     ज्योति     जलाये  । 
तुझे   हम    दिल    से    पुकारे  ।।
स्पर्श     कब      हो      पाओगी   । 
आओ फिर प्रेम का दीपक जलाये।।
नेह     निहारे      स्वप्न    सजाये । 

जीवन में सूर्य की प्रभा बिखरे। 
पूनम  की   चमक   सजाये ।। 
अंधेरे   में   तू   दीप  जलाने । 
प्रेम   जगाने   जो  आओगी ।। 
नेह   निहारे   स्वप्न  सजाये । **

                             - संगीत कुमार 
                        जबलपुर 

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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई 

माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

                          
               

3 comments:

  1. अति सुंदर कविता

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  2. मैं भी एक bloggerहूँ आप मेरी site पर आकर देखकर अपना प्यार दीजिये
    www.ojhalpoetry.in
    धन्यवाद

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  3. देव त्रिपाठी जी मैं बिल्कुल आपके इस ब्लॉग को देखूंगा |

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