29.2.20

नहीं नदी पर सेतु













( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक नदी कोलाहल '' से लिया गया है )


नहीं नदी पर सेतु 

नहीं नदी पर सेतु ,
न तट पर नाव ,
रहना ही होगा 
अब तो इस गाँव |

डूब रही रोशनी ,
देखता सहमा सन्नाटा ,
कुछ ठिठका , फिर करता 
सूरज भी टा - टा ;
इस अथाह ने तोड़े 
सबके पाँव |

यात्रा टूट रही है ,
द्वार दूसरों के ,
कब्रिस्तान - सरीखे 
खुदगर्ज ऊसरों के ;
कातर मन को जोड़ें 
कैसे इस ठाँव ?

          - श्रीकृष्ण शर्मा 
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www.shrikrishnasharma.com


संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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