17.2.20

समय
















( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के काव्य - संग्रह - '' अक्षरों के सेतु '' से सन,1968 में रची कविता )


समय 

पता नहीं चलता 
समय की मौजूदगी का 
जब मौजूद होते हैं अपने सब ,
- बतियाते हैं या 
किन्हीं भीतर 
या बाहरी
सुगंधों में खोते हैं |

लेकिन भावुक नहीं होता समय |

पूरी मुस्तैदी से -
खोलता रहता है वह हर गाँठ 
- तोड़ता रहता है हर कण |

... और 
अचानक 
कितना स्थिर हो जाता है ,
- हर पल 
- ह र क्ष ण ?

        - श्रीकृष्ण शर्मा
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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