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22.2.20

जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला - सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) में चिन्तन दिवस का कार्यक्रम

जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला - सवाई माधोपुर ( राजस्थान )
जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिला-सवाईमाधोपुर(राजस्थान) में चिन्तन दिवस का कार्यक्रम -
प्राचार्य - श्री हरीश कुमार खंडवाल 
उप प्राचार्य - श्री चोब सिंह 
                           

दिनांक 22/02/2020 को विद्यालय में चिन्तन दिवस मनाया गया | मंच संचालन श्री के. एम.पराते , संगीत शिक्षक द्वारा किया गया - 
श्री के.एम.पराते ( म्यूजिक टीचर )

इस कार्यक्रम का प्रारम्भ श्री पराते जी द्वारा स्काउट की शपथ दिलवा कर हुआ | इसके पश्चात कक्षा - 9 वीं  के छात्र ( स्काउट )  मा. दयाकृष्ण  शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए | इस अवसर का चित्र -

मा. दयाकृष्ण शर्मा 
 मा, दयाकृष्ण शर्मा ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि लार्ड बेडेन पावेल स्काउटिंग के जन्मदाता थे | इनके जन्म दिवस को चिन्तन दिवस के रूप में पूरा विश्व मानते आ रहा है |  बेडेन पावेल इंग्लेंड के निवासी थे | इनका पूरा नाम राबर्ट स्टीफेंसन स्मिथ बेडेन पावेल था | इनका जन्म 22 फरवरी 1857 को लंदन में हुआ था | इनके पिता का नाम हरबर्ट जोर्ज बेडेन पावेल था | माता का नाम हेनरेटाग्रेस स्मिथ था | इनकी शिक्षा लंदन में ही हुई थी | बाद में ये सेना में भर्ती हो गए | ये केवल 19 वर्ष के थे तब इन्हें सेना में लेफ्टिनेंट बनाकर भारत भेजा गया | कुछ समय बाद ये वापिस इंग्लेंड चले गए |
सन 1900 में दक्षिण अफ्रीका के '' बोर युद्ध '' के समय इन्हें छोटे - छोटे बालकों की असीम शक्ति , कर्तव्य - परायणता , कार्य - निष्ठ आदि गुणों का परिचय मिला | इससे लार्ड पावेल को विश्वास हो गया कि बालक युद्ध व शांति काल में विश्व को कितना लाभ पहुँचा सकते हैं | अपने इस विश्वास को रचनात्मक रूप देने के लिए इन्होने सन 1907 में  '' ब्राउन सी ''  नामक टापू पर मात्र 20 इलाकों का अपना प्रथम शिविर लगाया | इसकी सफलता से प्रेरित होकर बेडेन पावेल ने इस दिशा में और अधिक उत्साह से काम करना शुरू कर दिया |
 सन  1908 में उन्होंने स्काउटिंग की आधार पुस्तक  '' स्काउटिंग फॉर वोयज ''  लिखी | तदुपरांत स्काउटिंग सारे विश्व में फैलने लगी | सेना से अवकाश लेने के बाद लार्ड पावेल इस आन्दोलन के प्रचार - प्रसार में जुट गए |  सन 1921 में इन्होनें भारत में स्काउट की स्थापना की | सन 08 जनवरी 1941 को इन्होने कीनिया ( अफ्रीका ) में देह त्याग दी | 
विद्यालय के कंपाउंडर श्री बाबूलाल मीणा जी ने अपने विचार इस अवसर पर मंच से कहा -

श्री बाबूलाल मीणा 
 श्री बाबूलाल मीणा जी ने अपने विचार रखते हुए कहा की वैश्विक परिदृश्य एवं खानपान की बदलती आदतों के कारण खतरे सामने आ रहे हैं | इन खतरों में से एक निरन्तर नए रूप में आती virul flus नामक संक्रमित बीमारी है , जिसके फैलने की रफ़्तार बहुत तेज है | इसी कड़ी में गत कुछ दिनों में एक नया नाम निकलकर सामने आया है जिसे कोरोना नाम दिया गया है | यह विषाणु का समूह है जिसमे छोटे - छोटे बहुत से वायरस होते हैं | इसकी शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई है | वुहान शहर जहाँ यह बीमारी का रूप धारण कर चुका है | लगभग 2100 से ज्यादा मौत हो चुकी है | अब तक 25 देशों में यह अपना प्रभाव दिखा चुका है | 
इसकी उत्पत्ति का स्रोत अभी तक ज्ञात नहीं हो सका है | अलग - अलग मत के अनुसार उत्पत्ति का कारण समुद्री खाद्य के रूप में सामने आया | 
कोरोना एक बड़ा और गम्भीर खतरा -
कोरोना पहली बार 2003 में चीन ( sars ) एवं 2012 में अफ्रीका ( mers ) के रूप में पैदा होकर विश्व में अपना प्रभाव दिखा चुका है |कोरोना के बारे में सबसे गम्भीर चुनौती यह है कि यह अपना रूप परिवर्तित करता रहता है | जो कि इसके vaccine तैयार करने के काम को और भी मुश्किल कर देता है | इसके संक्रमण की रफ़्तार बहुत तेज है | 
भारत पर कोरोना का प्रभाव -
हालाकि इसकी उत्पत्ति वाला देश चीन है , परन्तु आज के परिदृश्य में आपस में global connectivity के कारण यह खतरा अन्य देशों में भी मंडरा रहा है | इसे गंभीरता से लेते हुए इसको रोकने के इंतजाम आवश्यक हैं ,जैसे - airport पर चैक पॉइंट बनाना , सरकारी व प्राइवेट news चैनल व अख़बारों से कोरोना के बारे में जागृति फैलाना , संक्रमण से गंम्भीर मरीजों के लिए वार्ड स्थापित करना | इस कड़ी में इस विषय के बारे में j.n.v. में जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी प्राचार्य के माध्यम से j.n.v. medical nurse staff एवं सदन प्रभारियों  , सदन के विद्यार्थियों के माध्यम से जागृति लाने की जिम्मेदारी दी गई है , ताकि विद्यार्थी अपने गाँव , समाज , परिवार में सूचना या जागृति ला सके | 
लक्षण -
इसके लक्षण सामान्य flu जैसे हैं | यह स्वसन तंत्र को प्रभावित करता है | इस लक्षण में नाक का बहना , तेज बुखार , श्वास लेने में तकलीफ , फेफडों में सूजन एवं गम्भीर केस में निमोनियाँ इत्यादि है |
उपचार या बचाब -
चूँकि इसकी अब तक कोई दवाई या vaccine नहीं बन पाई है | अतः बचाव ही उपचार है |  संक्रमित व्यक्ति से दूरी , छींकते - खाँसते समय टिशु पेपर या कपडा उपयोग करना , बार - बार हाथ धोना , माँस - अंडे इत्यादि अच्छी तरह पका कर खाना ,  भीड़ - भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना | अधिक दिन तक यह लक्षणनजर आने पर डॉ.के नियमित सम्पर्क में रहें | 
इस प्रकार श्री बाबूलाल जी मीणा ने स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी सभी को मंच से बताई | 
इसके पश्चात् प्राचार्य श्री हरीश कुमार खंडवाल जी ने सभी को सम्बोधित किया -
प्राचार्य श्री हरीश कुमार खंडवाल 
प्राचार्य सर ने अपने सम्बोधन में सभी को बेडेन पावेल द्वारा स्थापित स्काउट के महत्व को बताया | कहा कि हमेशा अपने आस - पास सफाई रखनी चाहिए , यही स्वस्थ्यता की निशानी है | हमें खाने - पीने में हमेशा ध्यान रखना चाहिए | मेस ओर घर की खाद्य बस्तुओं के अलावा बाजार की खाद्य बस्तुएं स्वास्थ्य के लिए हमेशा हानिकारक होती हैं | आप का तन साफ़ होगा , आप स्वस्थ्य रहेंगे तो आप की पढाई अच्छी होगी और इस समय आपका स्वस्थ्य रहना बहुत आवश्यक है क्योकि परीक्षा नजदीक है |
इसके बाद स्काउट - गाइड ने साफ़ - सफाई का अभियान किया |
इस प्रकार यह कार्यक्रम समाप्त हुआ |

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द्वारा -
सुनील कुमार शर्मा ,
पी.जी.टी. ( इतिहास ) ,
जवाहर नवोदय विद्यालय ,
जाट बड़ोदा , जिला - सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) .
  
     
  
   

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