3.2.20

पवन शर्मा की कहानी - '' घटना '' ( भाग - 1 )

( प्रस्तुत कहानी – पवन शर्मा की पुस्तक – ‘ ये शहर है , साहब ’ से ली गई है ) 


घटना 

कॉफ़ी का घूँट भरने के बाद मिसेज पण्डित ने पूछा , '' ऐसी कौन से बात हो गई थी , जिससे तुम बॉस पर एकदम बिगड़ गईं  और जोर - जोर से चीखने लगीं ? ''
          '' वह मुझे घूर रहा था | '' वह बोली |
          '' घूर रहा था | '' मेसेज पण्डित को आश्चर्य हुआ |
          '' हाँ | ''
          घूरने देती | '' मिसेज पण्डित हँसीं , वैसे अपना बॉस ऐसा नहीं है | बहुत शालीन है | तुम्हें ग़लतफ़हमी हुई होगी | ''
          '' वही ... वही तो | '' वह अकबका गई |
          '' अगर हम लोग नहीं पहुँचते तो तुम बॉस का मुँह नोंच लेतीं है न! '' मिसेज पण्डित फिर हँसी |
          '' सचमुच नोंच लेती मैं | '' वह आवेश में थी |
          कैफे - हाउस में गुलाम अली की गज़ल  ' ... हमको अब तक आशिकी का , वो जमाना याद है ... चुपके - चुपके ...'   मद्धिम आवाज में बज रही थी |
          '' आपको मालूम है  - बॉस की घूरती हुई गोल - गोल आँखें धीरे - धीरे चमकने लगी थीं , हिंसक भेड़िये की तरह | उसकी चमकती हुई आँखें मेरे सीने के उभारों पर थीं | ''
          '' फिर तुम आतंक से ग्रसित होकर चीखने लगी थीं ... है न | ''
          '' बिल्कुल सही | मैं आपे से बाहर हो गई थी - हमेशा की तरह | '' वह बोली | 
          दोनों के बीच में थोड़ी देर के लिए ख़ामोशी पसर गई |
          '' मुझे हमेशा लगता है कि आँखें अक्सर मुझे घूरती रहती हैं | '' उसने ख़ामोशी तोड़ी |
          मिसेज पण्डित अपने दोनों हाथों की कुहनियों को मेज पर टिकाकर बोली , '' क्या कहा तुमने कि दो आँखें तुम्हें हमेशा घूरती रहती हैं | ''
          '' हाँ - हाँ .. लगता है कि कोई मुझे घूर रहा है , पर कौन घूर रहा है - ये नहीं समझ पाती मैं | ''
          '' इसमें इतना आतंकित होने की कौन सी बात है ? ''
          '' पिछले कई दिनों से ... चमकती हुई आँखें ... उफ़ | '' धीरे - धीरे एक आतंक उसके चेहरे पर फिर से चिपकने लगा |
          '' यह तुम्हारा भ्रम है | तुम किसी डॉक्टर को दिखाओ | '' मिसेज पण्डित ने कहा और कॉफ़ी का घूँट भरा |
          '' पहले वहम लगता था , पर अब सब सही - अपनी कसम | '' वह तपाक से बोली |
          '' ऐसा तुम्हें कब और कहाँ महसूस होता है कि तुम्हें कोई घूर रहा है | '' मिसेज पण्डित ने बात पलटते हुआ पूछा |
          '' कभी भी ... कहीं भी ... कोई निश्चित समय नहीं ... कोई निश्चित स्थान नहीं | ''   उसने कॉफ़ी का घूँट भरा ,   '' ऑफिस में ... सिटी बस में या लोकल ट्रेन में ... मार्केट प्लेस में भी ... घर में ही मैं अपने को सुरक्षित पाती हूँ | ''
          '' तब कैसा महसूस होता है ? ''
          '' ऐसा लगता है , जैसे कि चमकती हुई आँखें मेरे चेहरे को , मेरे होठों को , मेरे सीने और नितम्बों के उभारों को घूर रही हैं - बेहद सूक्ष्मता के साथ | तब शरीर में पैनी - पैनी और छोटी - छोटी सुइयाँ चुभती - सी महसूस होती हैं | ''
          '' अजीब बात है | '' कहने के बाद मिसेज पण्डित ने कॉफ़ी का घूँट भरा |
          एकाएक दूसरी टेबिल पर बैठे स्मार्ट लड़के को अपनी ओर देखता पाकर उसके चेहरे पर वही आतंक गहराने लगा | उसने मिसेज पण्डित से कहा , '' आप उस लड़के को देख रही हैं - वह मुझे ही घूर रहा है | ''
          मिसेज पण्डित ने घूमकर उस लड़के को देखा , फिर कहा , '' मैं फिर कहती हूँ कि ये तुम्हारा वहम है | ''
          '' अब उसकी आँखों में चमक आ गई है | '' मिसेज पण्डित की बात अनसुनी कर वह कहती है |
          मिसेज पण्डित चुप रहीं |
          '' यही चमक तो मुझे आतंकित करने लगती है | धीरे - धीरे ये चमक लाल - लाल और गढ़े खून में तब्दील हो जाती है | ''
          '' मैं फिर से कहती हूँ कि ये तुम्हारा वहम है | ''
          '' उसके घूरने से मेरे शरीर में सुइयाँ चुभने लगी हैं | ''
          '' डोंट वरी ... तुम उधर मत देखो | '' मिसेज पण्डित ने कहा |
          उसने कॉफ़ी का घूँट भरा |
          '' अब कैसा फील कर रही हो ? '' मिसेज पण्डित ने पूछा |
          '' नॉर्मल | ''
          '' तुम ऐसा कब से फील कर रही हो ? '' मिसेज पण्डित ने जब उसे सामान्य होते देखा , तो पूछा |
          '' कई दिनों से | पहले भी कहा था |
          '' तुम्हें कोई कारण समझ में आता है ? ''
          वह चुप रही |
          '' और उस घटना का असर अभी भी तुम्हारे मस्तिष्क में बना हुआ है | इसी वजह से तुम एबनोर्मल हो जाती हो | ''   उसे चुप देख मिसेज पण्डित ने कहा |
          '' शायद | ''   अबकी बार वह बोली |
          '' शायद नहीं - निश्चित ही | ''   मिसेज पण्डित बोली , '' वही घटना तुम्हें हमेशा आतंकित किए रहती है | ''
          '' समझ में नहीं आता कि मैं क्या करूँ ? ''
          मिसेज पण्डित बोली , '' तुम उस घटना को याद करने की कोशिश करो और डॉक्टर की सलाह लो | ''
          '' कोशिश करुँगी | अभी तो याद नहीं आ रही है | ''   अब वह नॉर्मल हो गई थी |
          बैर कॉफ़ी का बिल ले आया | बिल चुकाकर दोनों कैफे - हाउस से बाहर निकल आईं | शाम का धुंधलका होने लगा | सड़क के किनारे बिजली के खम्भों पर लगे हैलोजन बल्ब जल उठे | चारों तरफ शहर की चमकीली रोशनी ! ... रंग - बिरंगे रंगों में ... लाल , पीली , नीली , गुलाबी , दुधिया रोशनी !
          सड़क पर चलती मिसेज पण्डित बोलीं , '' आज काफी देर हो गई | बच्चे चिन्ता कर रहे होंगे | ''
          वह मुस्करा पड़ी | बोली कुछ नहीं |

जब वह घर में घुसी, तब अँधेरा गाढ़ा हो गया था|उसे देखते ही माँ बोली, '' आ गई बेटी | ''
          '' हाँ ''
          भीतर से उसके पिता आ गए और सोफे पर बैठ गए | उसके पिता कम बोलते हैं |
          '' चाय बनाकर लाती हूँ | '' माँ ने कहा और किचिन में चली गईं |
          वह अपने पिता के सामनेवाले सोफे पर बैठ गई और बैक पर अपना सिर टिका दिया |
          एकाएक उसकी नजर दिवालघड़ी पर पड़ी | पौने आठ बज रहे हैं | रोज साढ़े पाँच बजे तक ऑफिस से घर लौट आती है | कभी देर हो जाए तो उसके पिता चिन्ता करने लगते हैं |
          माँ चाय बनाकर ले आई | उसने कप थामा और चाय के घूँट भरने लगी |
          उसके पिता अख़बार पढ़ने में तल्लीन थे | शासकीय नौकरी से सेवानिवृत पिता साहित्यिक कर्म से जुडे हुए थे और आज - कल लिखने पढ़ने में अधिक व्यस्त रहते हैं  | कभी - कभी आम पिताओं की तरह कई - कई चिन्ताओं में डूब जाते हैं - जैसे  उसकी शादी न हो पाने और उसके छोटे भाई राकेश के नौकरी पर न लग पाने जैसी चिन्ताओं में डूबना |
          उसने चाय का घूँट भरा |
          माँ भी बैठी हुई हैं - पिता के बाजूवाले सोफे पर |
          '' गुड्डू आया हुआ है | '' माँ ने कहा | वह चौंक गई |

                                                                                                          ( शेष भाग - 2 में )

                                          - पवन शर्मा 
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पवन शर्मा
कवि , लघुकथाकार , कहानीकार

पता –
श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट  विद्यालय ,
जुन्नारदेव  , जिला - छिन्दवाड़ा ( म.प्र.) 480551
फो. नं. - 9425837079 .
ईमेल – pawansharma7079@gmail.com

संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिला– सवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867 


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