1.3.20

ओ गीतकार !
















( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के गीत - संग्रह - '' बोल मेरे मौन '' से लिया गया है )


ओ गीतकार !

दुख - दर्द लिए ओ गीतकार ,
तू अपनी मस्ती में खोया !!

तुझ पर हँसते जाते अभाव ,
डंस रहे उपेक्षा के तक्षक ,
तिल - तिल कर जलता जाता तू ,
अपने गीतों में भोर तलक ;

पतझर दरवाजे खड़ा हुआ ,
खण्डहर पौली में अड़ा हुआ ,

पर अमृत औरों को देकर ,
तूने खुद विष का घट ढोया !

दुख - दर्द लिए ओ गीतकार ,
तू अपनी मस्ती में खोया !!

            - श्रीकृष्ण शर्मा 
----------------------------------------------------





संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

No comments:

Post a Comment

आपको यह पढ़ कर कैसा लगा | कृपया अपने विचार नीचे दिए हुए Enter your Comment में लिख कर प्रोत्साहित करने की कृपा करें | धन्यवाद |