6.3.20

शंख - ध्वनि दूर

















( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत संग्रह - '' एक नदी कोलाहल '' से लिया गया है )

शंख - ध्वनि दूर 

बुझा अभी ,
जलता अंगारा |

मद्धिम है रोशनी ,
हालत है सोचनी ;
दिन है अब ,
साँझ का उतारा |

बुझा अभी ,
अंगारा |

पका मोतियाबिन्द ,
धृतराष्ट्र हुआ हिन्द ;
शंख - ध्वनि दूर 
पार्थ द्वारा |

बुझा अभी ,
जलता अंगारा |

        - श्रीकृष्ण शर्मा 
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867


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