4.3.20

ख़त













( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' अँधेरा बढ़ रहा है '' से लिया गया है )


ख़त 

हर ख़त 
जैसे -
दुख का रथ |

आँसू 
हँसती आँखों में ,
पीड़ा लिये
ठहाकों में ,
कम्पित होंठ 
गीत की गत |
हर ख़त ...

लकवा मारा 
सपनों को ,
तेरहवीं क्या 
दफ्नों को ,
लेकिन 
इति ही 
अब तो अथ
हर ख़त ...

         - श्रीकृष्ण शर्मा 
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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