17.3.20

युद्ध हार कर खड़ा













( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक अक्षर और '' से लिया गया है )


युद्ध हार कर खड़ा 

रसा हुई  है अनरस ,
सचमुच 
धरती कितनी परवश ?

हवा हो गई हवा ,
गधे के सिर से जैसे - सींग ,
पेड़ खड़े निर्वाक ,
हाँकते बादल कोरी डींग ,
          किन्तु न सुन पड़ता 
          बूँदों का रसभीना कोरस ,
          युद्ध हार कर मौन खड़ा 
          जैसे उदास पोरस |
सचमुच 
धरती कितनी परवश ?

आँच दे रहा सूर्य 
लपट लिपटी भूमा बेनूर ,
हिया फट रहा , हुआ 
आँजुरी का अमृत काफूर ,
          फाँक रहा है सिर्फ़  ' सहारा '
          मत्स्य - विकल सारस ,
          पोरों से लग कर जैसे 
          गिर गया कहीं पारस 
सचमुच 
धरती कितनी परवश ?
                              **

            - श्रीकृष्ण शर्मा 
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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