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24.3.20

पवन शर्मा की लघुकथा - '' लंगड़ा ''



                   ( प्रस्तुत लघुकथा – पवन शर्मा की पुस्तक – ‘’ हम जहाँ हैं ‘’ से ली गई है ) 


                                     लंगड़ा

एकदम  सन्नाटा ... कहीं - कहीं कुत्तों के भौकने से सन्नाटा भंग हो जाता था | जहाँ - जहाँ बिजली के खम्भे थे , वहाँ - वहाँ प्रकाश फैला हुआ था , बाक़ी जगह अँधेरा था | सन्नाटे को भंग करती उसकी बैसाखियाँ और बैसाखियों पर झूलता वह आगे बढ़ रहा था |
          सामने बिजली के खम्भे  के प्रकाश में उसने देखा कोई खड़ा है | मन - ही - मन घबराने लगा | लेकिन बैसाखियों पर झूलता वह आगे बढ़ रहा था | नजदीक आकर देखा , उसी की उम्र का , मैले , कई जगह से फटे कपडे पहने , कोई लड़का है | मन थोडा शांत हो गया उसका |
          ' कहाँ से आ रहा है ? '  नजदीक आने पर लड़के ने उससे पूछा |
          ' स्टेशन से | '
          ' क्या कर रहा था वहाँ अभी तक ? '
          ' कैंटीन में कप - प्लेट धो रहा था | '  निश्चिंतभाव से उसने उत्तर दिया और आगे बढ़ने लगा | लड़का भी उसके बराबर हो लिया |
          ' कितना कमाया है ? '  लड़के ने चलते - चलते अँधेरे में ही पूछ लिया |
          ' सात रुपया ... सुबह से अभी तक के ... काम पूरा लिया | '  उसका चेहरा दयनीय हो उठा |
          ' तू झूठ बोल रहा है | सुबह से अभी तक के कम - से - कम दस का पत्ता होना था | '  सामने बिजली के खम्भे के बल्ब का प्रकाश उन दोनों के ऊपर आने लगा | पीछे उन दोनों की परछाइयाँ काफी बड़ी थीं |
          ' सच में ... सात दिए कैंटीन वाले ने | '  और सहजभाव से उसने हाफ पैंट की जेब में से एक - एक के मुड़े - तुड़े सात नोट दिखाए और बोला ,  ' अम्मा बीमार थी | इस वजह से ही मुझे काम करना पड़ा आज | '
          बिजली के खम्भे के निकट पहुँचकर लड़का बोला ,  ' दिखा ... गिनकर देखता हूँ ... साले काम तो करवाते हैं , लेकिन पैसा पूरा नहीं देते | '
          ' पूरे सात हैं | '  उसने कहा और रुपये लड़के को थमा दिए |
          लड़का रुपयों को गिनने लगा | एक ...और एक नोट उसको पकड़ा दिया | दो ... एक और नोट उसको पकड़ा दिया | तीन ... फिर एक और नोट उसको पकड़ा दिया | चार ... वह हाथ बढ़ा ही रहा था कि लड़का भाग खड़ा हुआ | वह चौंक गया |
          ' ऐ ... ऐ ... मेरे रूपये तो देता जा | '  बैसाखियों के सहारे वह आगे की ओर बढ़ा ... लेकिन लड़का अँधेरे में खो चुका था | विवशता से उसकी आँखों में आँसू आ गए ... फिर एकाएक गुस्से से उसके चेहरे पर तनाव आ गया ,  ' साला ... लंगड़ा ... साला ... दोनों पैर का लंगड़ा ... साला ... | '
                                                                                                **

                                    -पवन शर्मा 
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पवन शर्मा
कहानीकार , लघुकथाकार , कवि 

पता
श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट  विद्यालय ,
जुन्नारदेव  , जिला - छिन्दवाड़ा ( म.प्र.) 480551
फो. नं. - 9425837079 .
ईमेल – pawansharma7079@gmail.com

संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

          

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