5.1.20

तक कर हुए चकोर !


( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के गीत - संग्रह - '' फागुन के हस्ताक्षर '' से लिया गया है )














तक कर हुए चकोर !

तुमको रहे अगोर नैन दो !

दूर - दूर तक भटक - भटक कर ,
आँज - आँज कर सिर्फ़ रातभर ;
तक कर हुए चकोर नैन दो !

तुमको रहे अगोर नैन दो !

थक कर चूर - चूर है अब दिन ,
स्याह - स्याह होता हर पल - छिन ;
दिये दर्द में बोर नैन दो !

तुमको रहे अगोर नैन दो !

बूंद - बूंद कब होंगे बादल ?
धान - धान कब होगा आँचल ?
कब हो शरद - अँजोर नैन दो ?

तुमको रहे अगोर नैन दो !

       - श्रीकृष्ण शर्मा
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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