1.1.20

ओ मेरे कवि

( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के गीत - संग्रह - '' बोल मेरे मौन '' से लिया गया है )
ओ मेरे कवि 

ओ मेरे कवि , चुप मत रहना !!

सब चुप हैं , पर तू सच - सच ही 
सारे जग के सम्मुख कहना !
ओ मेरे कवि , चुप मत रहना !!

अनचाहे संक्रांति काल में 
बेगानी है दृष्टि समय की ,
चारों ओर घिरी हैं गूँगी
छायाएँ आतंक व भय की ;

बन्धों - प्रतिबन्धों का आलम ,
पटे पड़े जुल्मों से कॉलम ;

शब्द - ब्रह्म की खातिर , आहुति 
बन साधना - यज्ञ में दहना !
ओ मेरे कवि , चुप मत रहना !!

        - श्रीकृष्ण शर्मा 
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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