26.1.20

एक देशद्रोही का आत्म - कथ्य















( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक नदी कोलाहल '' से लिया गया है )


एक देशद्रोही का आत्म - कथ्य 

शीश नहीं ,
हम तो बस सिर्फ़ हैं कबन्ध |
अपना तो परिचय है 
- जाफ़र - जयचन्द |

खड़े हुए 
कोई भी पाँव धरे ,
बड़े हुए 
मगर बंटे ओ ' बिखरे ;

नाटक के पत्रों - सा 
रखकर सम्बन्ध |
अपना तो परिचय है 
- जाफ़र - जयचन्द |

स्वर्ण - कलश 
पर हम हैं छेर पड़ी ,
जीवन - रस 
में हम है विषखपड़ी ;

स्वार्थों से किया सदा 
हमने अनुबन्ध |
अपना तो परिचय है 
- जाफ़र - जयचन्द |

नदियों को 
जब चाहा सोख लिया ,
सदियों को बढ़ने से रोक दिया ;

सुनने में थे सदैव 
हम ललित निबन्ध |
अपना तो परिचय है 
- जाफ़र - जयचन्द |

             - श्रीकृष्ण शर्मा 
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 www.shrikrishnasharma.com


संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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