23.1.20

एक नदी कोलाहल


( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक अक्षर और '' से लिया गया है )

एक नदी कोलाहल 

डूबे आवाजों में 
उजले स्वर !

      एक नदी कोलाहल 
      चढ़ा हुआ ,
      कुछ भी तो रहा नहीं 
      पढ़ा हुआ ,
लगते हैं धुंधलाते 
शुभ अक्षर !

डूबे आवाजों में 
उजले स्वर !

      पश्चिम का टाइफून 
      ये अथाह ,
      पत्थर की नाव लिये
      सार्थवाह ,
थर्राता घर ही क्या ,
गाँव - शहर !

डूबे आवाजों में 
उजले स्वर !

- श्रीकृष्ण शर्मा 
-------------------------------------------------


संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867


No comments:

Post a Comment

आपको यह पढ़ कर कैसा लगा | कृपया अपने विचार नीचे दिए हुए Enter your Comment में लिख कर प्रोत्साहित करने की कृपा करें | धन्यवाद |