24.12.19

मावट की बारिश होने पर

( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक अक्षर और '' से लिया गया है )













( कहते हैं  ' सावन की झरन , भादौं  की भरन ' , किन्तु भादौं  सूखी गयी | पानी नहीं बरसा | परन्तु वर्ष के अन्तिम दिन 31 दिसम्बर 2000 को रात में अच्छी वर्षा हुई | फलस्वरूप यह रचना लिखी गई )

मावट की बारिश होने पर 

आज हवा कुछ सीली - सी है ,
धरती गीली है ,
लगा 
विदा के वक्त 
वर्षा की आँख पनीली है |
          कुछ दिन पहले 
          जेठ लिये था 
          हाथों जलती हुई लुकाठी ,
                    तार - तार की 
                    छांह गदीली 
                    मार - मार किरनों की साँटी ,
लगा 
रेत से बतियाने में 
भादौं भूली 
चूल्हे रक्खी हुई पतीली है |
          देखा मैने 
          शाम - शाम को 
          आसमान में कुछ कपास थी ,
                    पर उम्मीद न थी 
                    पानी से ,
                    जीवित छन्दों के छपास की ,
सुबह हुई 
साँसें गन्धायीं
लगा तृषित माटी ने 
रात वारुणी पी ली है |

             - श्रीकृष्ण शर्मा 
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www.shrikrishnasharma.com

 संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867
    







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