21.12.19

'' अय्यारों की बस्ती में ''

( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक अक्षर और '' से लिया गया है )














अय्यारों की बस्ती में 

हैं बींध रहे दुर्दिन , पर किसको लिखें पाती ?
चौहद्दियों सन्नाटा , व्यूह तिलिस्माती !!
अय्यारों की बस्ती ये ,
सच की शिनाख्त मुश्किल ,
है इनमें कौन दर्दी ,
है इनमें कौन कातिल ?
एक आँख रो रही है , एक आँख मुस्कराती |
चौहद्दियों सन्नाटा , है व्यूह तिलिस्माती | |
इस आग के सफ़र में 
क्या चीखना चिल्लाना ?
बेरहम हवाओं में 
कुछ और सुलग जाना 
रिश्तों की देहरी पर , तामाशायी बाराती |
चौहद्दियों सन्नाटा , है व्यूह तिलिस्माती !!
पहरे पे खड़े अन्धे ,
हैं भाँजते तलवारें ,
राजा के भाग्य में हैं ,
बस खौफ़ , घुटन हारें ,
बंजर उगीं घटनाएँ , जंगल हुए शहराती |
चौहद्दियों सन्नाटा , हैं व्यूह तिलिस्माती !!
है दर्द का समन्दर ,
हर साँस - साँस डूबी ,
फिर भी तो जिये जाती ,
ये ज़िन्दगी अजूबी ,
सौ सांसतों कबीरा की साखियाँ बतियातीं |
चौहद्दियों सन्नाटा , हैं व्यूह तिलिस्माती !!

                       - श्रीकृष्ण शर्मा 
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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867


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