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डॉ0 योगेन्द्र गोस्वामी - " आस्थाओं का हिमवान " ( भाग - 7 )

 इसे कवि श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " मेरी छोटी आँजुरी " ( दोहा - सतसई ) से लिया गया है | यह पुस्तक की भूमिका है -


मेरी छोटी आँजुरी 


आस्थाओं का हिमवान 

भूमिका ( भाग - 7 )


भाग - 6 का अंश -

... कभी संघर्षों की छाया में कुरुक्षेत्र का स्मरण आता है तो कभी विजयपर्व पर रची गयी

 दीपमालिका का सुकुमार सौंदर्य | अंधकार और प्रकाश का सनातन संघर्ष नये रूपों में इस

 काव्य में संकलित किया गया है धृष्ट या अशिष्ट बलात्कारी आचरणों के लिए उसकी

 भर्त्सना भी की गयी हे | ...


भाग - 7 

 

... तिमिर की धृष्टता और सिन्धु का आर्तनाद दृष्टव्य है और बूढ़े पहाड़ का चुपचाप देखना उसकी विवशता ही है –

          मर्यादा की सब परिधि , तिमिर गया है लाँघ |

          घेर घार कर चाँदनी की उघाड़ दी जाँघ ||

          आर्तनाद सुन सिन्धु का , खाती लहर पछाड़ |

          मूक स्तब्ध सा देखता , बूढ़ा अचल पहाड़ ||

     दीपपर्व का एक रूप – इस में संघर्ष और जिजीविषा विद्यमान है –

          इस गहरे तम – तोम को , गयी अमावस लीप |

          किन्तु दीवाली सज रही शत – शत ज्योतित दीप ||

          सूर्य चन्द्रमा हारकर , छोड़ गये मैदान |

          काल रात्रि से युद्धरत , पर नन्हा दिनमान ||

          दीपक के वर्णन में व्यंजनाएँ उभरती है –

          प्राण गलाकर साँस का , निशि भर रहा समीप |

          सुबह हुई तो मनुज ने , बुझा दिया वह दीप ||

          निशि के श्यामल अंग पर , डाल प्रकाश दुकूल |

          जूड़े में खोंसे दिये ने बाती के फूल ||

     सतसई का दूसरा पक्ष यथार्थ जीवन का दुर्दर्ष रूप है | कवि ने युग यथार्थ को सामने रखकर एक चित्रशाला सजायी है | युग का सजीव इतिहास ही यहाँ अंकित है | कवि की कल्पना चतुर्दिक फैले घटना प्रसंगों को निरुपित करती है | अनेक समस्याएँ हैं , जिनकी जड़े गहरी हैं | चाहे घर – घाट की हों , चाहे व्यापार और राजनीति की , चतुर खलनायकी में सिद्धहस्त लोगों के हाथ में समय की बागडोर आ गयी है और वे इस देश की प्रजा को जैसे चाहें नाच नचाते रहते हैं | आम आदमी की लाचारी है कि वह भूख , दरिद्रता , लूट और शोषण से त्रस्त बना रहे और कुछ न कर सके | वातावरण अत्यन्त जटिल और विषाक्त है | कवि श्रीकृष्ण शर्मा जी ने अनेक प्रश्न खड़े कर दिए हैं किंकर्तव्यविमूड़ता की स्थिति है | एक से एक उद्धरणीय प्रसंग यहाँ उपस्थित हैं | इस प्राचीन आदर्शवादी देश का मनोबल जीर्ण – शीर्ण अवस्था में पहुँच चुका है , जीवन की राह कठिनाइयों से भरी हुई है | समाज – सेवा , धार्मिक अनुष्ठान , स्वास्थ्य , शुचिता – स्वच्छता आदि के लिए बड़े – बड़े प्रकल्प बनते हैं पर सभी कागजों पर ही बनकर रह जाते हैं | सर्वत्र धोखाधड़ी और पाखण्ड का साम्राज्य है | संसद हो या न्याय का मंदिर खुलेआम लूट , भ्रष्टाचार और तानाशाही , हिंसा और आतंक से ग्रस्त प्रजातंत्र का मज़ाक बनाने में संलग्न हैं –

          अर्ध्दशती में हो गया , अभिशापित परिवेश |

          त्रस्त – पस्त – सन्तप्त जन , दुख दारिद्रय व क्लेश ||

          फुर्र हो गये स्वप्न सब , जीना हुआ मुहाल |

          चौतरफा हैं भेड़िये औ’ खून के दलाल ||

          झुकी रीढ़ चश्मा चढ़ा , बोझ किताबी ओट |

          उफ़ बच्चों को बन गया , शाप ज्ञान विस्फोट ||

          किस्से गुड़िया , लुकछिपी , पन्नी , तितली , फूल |

          बस्ते के बोझा तले , गया बचपना भूल ||

          लोकतंत्र में भी हमें , नहीं मिल रही राह |

          हर नेता उभरा यहाँ , बनकर तानाशाह ||

          इन्द्रप्रस्थ दिल्ली बनी , कौरव सत्ताधीश |

          पाण्डव निर्वासित मगर , दल्लों को बख्शीश ||

          जले गरीबी मोम सी , महंगाई सी आग |

          खेल रही सत्ता मगर , सुख सुविधा से फाग ||

          घूस दलाली तस्करी , घोटालों का राज |

          मुश्किल हुआ गरीब को , मिलना रोटीदाल ||

                           00

          त्यागी बलिदानी गड़े , बने नींव की ईंट |

          उनके ऊपर हैं खड़े , आप स्वारथी ठीठ ||

          उत्तर देगा कौन अब , प्रश्न खड़े बेहाल |

          विक्रम नेता बन गया , टंगा ठगा बेताल ||

          जो धन – बल के सामने , करता तिकड़ी नाच |

          वही न्याय जन के लिए , अंधा क्रूर पिशाच ||

          भ्रष्ट , धृष्ट निष्कृष्ट औ’ लोलुप तथा लबार |

          बने आज भी देश में , हैं झंडाबरदार ||

          चिथड़े – चिथड़े हो चुका , बदलो सभी प्रबन्ध |

          संविधान में हैं लगे , जगह – जगह पैबन्द || **

 

                                              ( शेष भाग – 8 में )


                                                        - डॉ0 योगेन्द्र गोस्वामी  


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867


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