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7.2.21

कवि अभिषेक जैन की कविता - " बसंत "

 















बसंत 


इसमें तो कहीं

दिखते नहीं है
मुझको
हर भरे पेड़
शहर वीरान हो।
गया है
हरियाली से
जो उसकी सुंदर।
को बढ़ाती थी
बचाते थे
वो सभी को
जून की गर्मी से
अक्सर।
अब वो
काट दिए गए हैं
जो मेरे
घर के बाहर
लगे थे
जिनके बारे में
मेरे दादा ने
ये बताया था
कि उनको
देखते हुए 
हमको
बचपन से जवानी  आई
अब वीरान देखकर
शहर को
दुःख तो होता ही हैं भाई  **


           - अभिषेक जैन

                         पथरिया दमोह 
                         मध्यप्रदेश

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

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