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24.2.21

कवि अभिषेक जैन की कविता - " बच्चे "

 









बच्चे

 

अभी तुमको दिखने है

कई बुरे दिन

जो तुमने देखें नहीं है

क्योकि अभी तुमने

खुद कमाना नहीं सीखा है

जरा सी जरूरत पड़ ने

पर

मांगने आ जाते हो

पैसे मुझसे

लोकिन मैं

हमेशा

तो नहीं रहूं गा

मदद करने को तुम्हारी

मेरे बाद

कहा जाओगे

मदद को तुम

इससे अच्छा तो

तुम खुद कमाओ

दिए हैं हाथ

तुमको खुदा ने

जाओ उनसे खुद खाना कमाओ

मेरी बातों को समझो

मैं कोई दुश्मन नहीं हूं

जो तुम्हारा में 

बुरा सोचूं गा

मेरी बातों को समझो

तुम खुद को अब काबिल बनाओ

मेरे बच्चे अब हो चुके हो

बड़े

तुम

अब जरा होश में तो‌ आओ   **



 

         - अभिषेक जैन

                            पथरिया , दमोह , मध्यप्रदेश







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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

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