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17.2.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - " सन्ध्या " - ( दो )

 यह नवगीत , कवि श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अँधेरा बढ़ रहा है " ( नवगीत - संग्रह ) से लिया गया है -















" सन्ध्या "- ( दो ) 


          सन्ध्या के संग मिटा ,

          सूरज का स्वर्ण - लेख |


डूब गयी सबकी सब 

बस्ती काले जल में ,

उलझा रह गया शिखर 

मन्दिर का बादल में |

          यात्राएँ ठहर गयीं 

          सड़कें अधरंग देख |


नीड़ों में सोयी है 

अब थकान दिन भर की ,

जाग रहा सिर्फ दिया 

आस सँजो घर भर की |

          सन्नाटा बजता है ,

          रातों की लिये टेक |


धरती का उजियारा 

हथियाया तारों ने ,

गठियाये सपने सब 

धूर्त औ '  लबारों ने ,

          उफ़ , पिशाच - सीनों में ,

          गड़ी नहीं किरन - मेख |  **


              - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


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