2.7.20

कवि कमलेश शर्मा "कवि कमल की कविता - '' "गुरु वंदना ''




      






गुरु वंदना

तेरी महिमा अपार, आया में तेरे द्वार।
मेरी नैय्या को कर, देना भव से पार ।।

जब   से  आया  हूँ  में,  तेरी  छाया  तले ।
मिट गये सारे तम, मुझकों गुरुवर मिले।।

गुरु चरणों की रज से, हो  जीवन  सफल ।
जो भी आशीष पाता,  ना  होता  विफल ।।

तुम बिन ज्ञान के,  दीप  कैसे  जले ।
बिन गुरु के विधाता भी, कैसे मिले।।

दिया हमको ज्ञान, करते है गुणगान ।
गुरु के नाम का, हमको है अभिमान।।

कोई हमको, हिमालय सी पीर दे।
साथ हे जो गुरु, तो उसे चिर दे ।।

अ से अनपढ़ थे हम, ज्ञ से ज्ञानी बने।
रीती थी मेरी बगियाँ, तुम माली बने।।

विद्या के मंदिर की, तुम वो मूरत हो।
करते दर्शन सभी, तुम  वो  सूरत  हो ।

गुरु ही पूज्य है, गुरु ही सर्व है ।
गुरु वंदन करो, गुरु का पर्व है।।

करो स्वीकार मेरा, नमन गुरुवर ।
भेंट करता "कमल",मेरे पूज्यवर।। **

                   (अध्यापक)
               मु.पो.-अरनोद, जिला:-प्रतापगढ़ (राज.)
               मो. 9691921612














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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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