22.7.20

लघुकथाकार पवन शर्मा - '' नींव ''


( प्रस्तुत लघुकथा – पवन शर्मा की पुस्तक – ‘’ हम जहाँ हैं ‘’ से ली गई है ) 



                                        नींव




‘ तुम कुछ नहीं कर सकते | जो कुछ करना है अब मुझे ही करना है | तुम तो हाथ – पर हाथ रखे बैठे रहो | ’  मम्मी की तल्खी चरमसीमा पर थी | पापा चुप बैठे थे | मम्मी की तल्खी के सामने पापा अक्सर शाँत और चुप ही रहते थे |
          ‘ मैंने पहले भी कहा था कि दुनियाँ जिस रास्ते पर चल रही है उसी पर तुम भी चलो | लेकिन तुम ... तुम तो हरिशचन्द्र हो | ’ मम्मी फिर तल्खी से कहती हैं |
          पापा चुप ही रहते हैं | अनुशासन व ईमानदारी से कार्य न करने वाले कर्मचारियों को बुरी तरह लताड़ने वाले पापा अक्सर मम्मी के सामने अपना मुँह नहीं खोल पाते |
          ‘ वो गुलाटी बहुत कमीना है | पहले भी तुम्हें उसी ने फँसाया था और अब फिर | एकाउन्ट के मामले में तो तुम्हें सावधानी बरतनी चाहिए थी | ’  मम्मी की आवाज बेहद तल्ख़ थी , ’ बाप रे , बाप ! लाखों का घपला – तुम्हारे सिर | ’
          मुझे पापा की ओर से कोई आवाज सुनाई नहीं देती |
          ‘ मि. दयाल ही डिविजनल मैनेजर हैं न ? ’  इस बार मम्मी की आवाज नर्म थी |
          ‘ तुम उनके पास नहीं जाओगी सुमि...समझीं तुम ! ’  एकाएक पापा दहाड़े ,  ' शराब का नशा ... सिगरेट का कसैला धूआँ ... उन्मुक्त हँसी ... ठहाके ... ठिठौली ... और तुम ... दयाल की बाहों में झूमती तुम ... | ’  कहते – कहते पापा की आवाज धीमी और आहत – सी हो उठती है ,  ' केस सॉल्व करवाने का यह तरीका कौन – सा है ? ... तीन वर्ष से यह प्रश्न मेरे लिए अनुत्तरित है सुमि ! ’
           ‘ उस वक्त तुम्हें बचा लिया ... नहीं तो बैठे रहते सस्पेंड होकर घर में | ’  मम्मी बहुत जोरों से चीखीं |
          पापा चुप थे – हमेशा की तरह |
          मुझे लगा कि इतने बड़े आलीशान बंगले की दीवारें हिल रही हैं किन्तु , मम्मी के इतने जोर से चीखने के बाद भी पापा क्यों चुप थे ? **


 - पवन शर्मा 

पता

श्री नंदलाल सूद शासकीय उत्कृष्ट  विद्यालय ,
जुन्नारदेव  , जिला - छिन्दवाड़ा ( म.प्र.) 480551
फो. नं. - 9425837079 .
ईमेल – pawansharma7079@gmail.com



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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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