17.7.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - '' ज़िन्दगी में क्या घटा ऐसा ? ''















ज़िन्दगी में क्या घटा ऐसा ?




हादसे होते रहे ,
सोते रहे हम ,
था न हमको दर्द
या गम !


जागते तो
कुछ कसक होती ,
आँख उगते
दर्द के मोती ;


मूर्त होता
इन क्षणों मातम !


जिन्दगी में
क्या घटा ऐसा ?
बढ़ी खुदगर्जी ,
हुआ है अहम पैसा ;


और बौना
हो चला आदम | **



  - श्रीकृष्ण शर्मा 







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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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