11.7.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - '' अपना है बचा क्या ? ''

( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक नदी कोलाहल '' से लिया गया है )











अपना है बचा क्या ?




चल रहे हम
दूसरों के पाँव ,
अपना है बचा क्या ?


दृष्टि अपनी
दृश्य औरों के ,
कह रहे हम
गर्व से सब
कथ्य औरों के ,


छोड़ बैठे जो
उन्हीं पर आजमाते
हम उन्हीं के दाँव ,
अपना है बचा क्या ?


प्रश्न हैं
पर नहीं उत्तर हैं ,
बिक रहे जो
जिन्स – जैसे
शीर्ष पर हैं ;


द्वार का जो काट बरगद
तक रहे ललचा
परायी छाँव ,
अपना है बचा क्या ? **




   - श्रीकृष्ण शर्मा 






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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867



1 comment:

  1. बहुत सुन्दर।
    यदि आप दूसरों के ब्लॉग पर कमेंट करने नहीं जायेंगे तो आपके यहाँ भी कमेंट के लाले पड़ जायेंगे।

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