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20.6.21

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - " वैशाख "

 यह नवगीत , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " अँधेरा बढ़ रहा है " ( नवगीत - संग्रह ) से लिया गया है -















वैशाख 


खो गया है सब कुछ ,

समय की अतल गहराइयों में |

          टिकती नहीं है  ताज़गी ,

          निरर्थक अँगड़ाइयों में |

हवा के हमराह 

तीतरपाँखी मेघ ,

आकाश की आँखें नहीं ढँकते |

प्रत्यंचा - सी तनी

गद्दर काया तलैया की ,

झुर्रियों के सरीसृप  डंसते |

          यहाँ - वहाँ 

          कहीं - नहीं 

          अता - पता वसन्त का |

मोहक गीत सरसों के 

खेत नहीं रचता |

          ... और 

          ढाक तीन पात ,

          जल - जल कर हुआ खाक |

अन्त नहीं 

लेकिन वैशाख का ,

रात - दिन बजती 

पीपल की शहनाइयों में |  **


                        - श्रीकृष्ण शर्मा 


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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.

 

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