11.11.19

'' हुए अपरिचित हम ''


( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' एक नदी कोलाहल '' से लिया गया है )














'' हुए अपरिचित हम ''

इस सन्ध्या के तम में 
हुए अपरिचित हम |
अपने लिए निरर्थक ,
अपने ही उपक्रम |

तर्क खड़े हैं तनकर ,
बहसें आग लिये ,
छूँछे शब्द गरजते 
होठों झाग लिये ;

दुर्गन्धित बातों से ,
प्रदूषिता सरगम |

रिश्तों की गरमाहट
महज दिखावा है ,
फूल - हँसी मौसम का 
सिर्फ़ छलावा है ;

अहसासों पर भारी ,
स्वार्थ और दिरहम * |

                       - श्रीकृष्ण शर्मा 
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* दिरहम : संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा


संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867

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