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13.2.22

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का गीत - " वक्त की बात "

 यह गीत, श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " बोल मेरे मौन " ( गीत-संग्रह ) से लिया गया है -











वक्त की बात 


बंधु, यह तो वक्त की है बात  !!


सत्य को समझा गया जब झूठ ,

स्वत्व को माना गया जब लूट ,

उफ़, मनाने पर नहीं माना 

सिरफ़िरा अपना गया जब रूठ ;


चाँदनी के घर कुहासा है ,

सिंधु जब नभ में  रुआँसा है ,


बर्फ़ की तह  है जमी मन पर ,

तप्त आतप का कि जब उत्पात !


बंधु यह तो वक्त की है बात !!  **


- श्रीकृष्ण शर्मा 

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संकलन - सुनील कुमार शर्मा 

फोन नम्बर - 9414771867

2 comments:

  1. धन्यवाद आदरणीय आलोक सिन्हा जी |

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