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23.11.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का नवगीत - " निशि - दिन अब धृतराष्ट्र व गांधारी "

 यह नवगीत , श्रीकृष्ण शर्मा की पुस्तक - " एक नदी कोलाहल " ( नवगीत - संग्रह ) से लिए गया है -









निशि – दिन अब धृतराष्ट्र व गांधारी

 

तुमने दीवाली पर दीपक ख़ूब जलाये थे !!

 

सिर पर उजियारे की पगड़ी

बाँधे रहा दिया ,

तम अनियारे रखा , देह में

तब तब रक्त जिया ;

काल – रात्रि में ज्योति – केतु घर – घर फहराये थे !

तुमने दीवाली पर दीपक ख़ूब जलाये थे !!

 

पर अब भी शातिर अँधियारा

पसरा धरती पर ,

नक्षत्रों का बोझ लिये

बेमानी है अम्बर ;

मावस ने दहशत के ऐसे व्यूह बनाये थे !

तुमने दीवाली पर दीपक ख़ूब जलाये थे !!

 

अब न दिवाली निशि – दिन अब

धृतराष्ट्र व गांधारी ,

और हस्तिनापुर में है

दुर्योधन की पारी ;

जिसकी खातिर भीष्म – कर्ण ने शस्त्र उठाये थे !

तुमने दीवाली पर दीपक ख़ूब जलाये थे !!

 

बचकर रहना शकुनी की तुम

घातक चालों से ,

अभिमन्यु के बधिकों औ’

लाक्षाग्रह वालों से ;

मारो ज्यों न भीष्म से अन्यायी बच पाये थे !

तुमने दीवाली पर दीपक ख़ूब जलाये थे !! ** 

 

                                                                     - श्रीकृष्ण शर्मा 

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संकलन – सुनील कुमार शर्मा , जवाहर नवोदय विद्यालय , जाट बड़ोदा , जिला – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , फोन नम्बर – 9414771867.


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