8.6.20

कवि श्रीकृष्ण शर्मा का गीत - '' ऐसी आग भरो ! ''

( कवि श्रीकृष्ण शर्मा के गीत - संग्रह - '' बोल मेरे मौन '' से लिया गया है )


















ऐसी आग भरो !


कोई ऐसी बात कहो जो हास जगाए , पुलक बिखेरे
कोई ऐसा काम करो जो बंधन चटकें , टूटें घेरे !!


कुम्हलाए उदास चहेरों पर
है कितनी मायूसी छाई ,
चिन्ताओं ने है ललाट पर
गहरी वक्र लकीर बनाई ;


गाज गिरी हो ऐसा मन है ,   
डसा साँप ने ऐसा तन है ,
कोई मरा पड़ा हो ऐसा
हुआ मातमी घर – आँगन है ;


सब अपने – अपने में खोए
बीहड़ जंगल सिर पर धोए ;


कोई ऐसी आग भरो , दुख – ताप जलें , उजलायें सवेरे !
कोई ऐसी बात कहो जो हास जगाए , पुलक बिखेरे !! **


       - श्रीकृष्ण शर्मा

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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई

 माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867


        

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